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Saturday, March 14, 2026

पिलुवा जंगल पहुंचे स्वामी कैलाशानंद गिरी, महायज्ञ के लिए किया बेलपत्र चयन

 पिलुवा जंगल पहुंचे स्वामी कैलाशानंद गिरी, महायज्ञ के लिए किया बेलपत्र चयन

जमुई/बांका। आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति के वातावरण के बीच श्रीश्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वर सह निरंजनी पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज शुक्रवार को बांका जिले के आनंदपुर थाना क्षेत्र स्थित पिलुवा जंगल पहुंचे। उनकी इस पावन यात्रा का मुख्य उद्देश्य भगवान शिव को अत्यंत प्रिय बेलपत्र का चयन करना था, जिनका उपयोग सिमुलतला में चल रहे शिव शक्ति रुद्र महायज्ञ और शिव महापुराण कथा के विशेष अनुष्ठान में किया जाएगा।

बताया गया कि पिलुवा पहाड़ से लाए गए बेलपत्र बैद्यनाथधाम मंदिर की गांवाली पूजा में भी भगवान शिव को अर्पित किए जाएंगे। स्वामी कैलाशानंद गिरी ने पिलुवा पहाड़ की महिमा का वर्णन करते हुए इसे बैद्यनाथ धाम का कैलाश और महादेव का श्रृंगार पर्वत बताया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय हैं, उसी प्रकार यह पर्वत बेल के वृक्षों से आच्छादित होने के कारण शिव-शक्ति का निवास स्थान माना जाता है।

स्वामी जी ने कहा, “दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनं पापनाशनम्”, अर्थात महादेव की कृपा से यहां आकर बेलपत्र का दर्शन और स्पर्श करना भी पापों का नाश करने वाला माना गया है। उन्होंने बताया कि सिमुलतला आश्रम में आयोजित शिव महापुराण कथा का पांचवां दिन था और कथा यज्ञ की पूर्णता के लिए पिलुवा जंगल के बेलपत्रों को विधिवत तोड़ा गया। बेलपत्र तोड़ने से पहले बेल के वृक्ष की पूजा-अर्चना की गई और भगवान शिव से अनुमति ली गई।

इस आध्यात्मिक यात्रा में कई प्रमुख पुरोहित और भक्त शामिल हुए। इनमें निर्मल झा (महामंत्री), पंडा समाज के प्रमुख, सुशील पलिवार, धीरज पलिवार, सुशील पंडा, झलकू पंडा तथा 80 वर्षीय प्रेम बाबा शामिल थे। इसके अलावा आचार्य सागर झा, आचार्य पवन दत्ता, विभिन्न मठों के ब्रह्मचारी, साधु-संत और बांका जमुई जिले के सुरक्षा कर्मी भी उपस्थित रहे।

यात्रा के समापन पर “हर हर महादेव” और “विश्व का कल्याण हो” के जयघोष से पूरा पिलुवा जंगल गुंजायमान हो उठा। स्वामी कैलाशानंद गिरी ने गौ माता की जय और धर्म रक्षा का संदेश देते हुए सभी सनातन प्रेमियों के मंगल की कामना की। उन्होंने कहा कि उनका संपूर्ण जीवन भगवान शिव को समर्पित है और इस पावन भूमि से लाए गए बेलपत्रों से भगवान शिव का अभिषेक किया जाएगा।

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