जमुई में पैक्स अध्यक्षों व प्रबंधकों के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला, डीएम ने दिया विविधीकरण का मंत्र, पैक्सों को डिजिटल व बैंकिंग सेवाओं से जुड़ने की सलाह
जमुई : सहकारिता विभाग, बिहार सरकार के निर्देश पर गुरुवार को जमुई जिला मुख्यालय स्थित न्यू द्वारिका विवाह भवन में जिले के पैक्स अध्यक्षों, प्रबंधकों और व्यापार मंडल अध्यक्षों के लिए एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि जिला पदाधिकारी श्री नवीन कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर सहकारिता विभाग के अधिकारी और जिले भर से बड़ी संख्या में पैक्स प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएम ने कहा कि पैक्स (प्राथमिक कृषि साख समिति) ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ पैक्सों को पारंपरिक कार्यों से आगे बढ़कर व्यावसायिक विविधीकरण की दिशा में काम करना होगा। उन्होंने बताया कि अब पैक्सों को केवल ऋण और खाद-बीज वितरण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) और डिपॉजिट मोबिलाइजेशन एजेंट के रूप में विकसित कर किसानों को जमीनी स्तर पर बैंकिंग और डिजिटल सेवाएं उपलब्ध करानी चाहिए।
कार्यशाला के दौरान विषय विशेषज्ञों ने पैक्सों के सुदृढ़ीकरण पर विस्तार से चर्चा की। सेवानिवृत्त संयुक्त निबंधक अजय कुमार अलंकार ने पैक्सों के प्रशासनिक एवं वित्तीय दायित्वों के साथ उद्यमशीलता के विकास पर मार्गदर्शन दिया। वहीं, भागलपुर प्रमंडल के संयुक्त निबंधक (अंकेक्षण) मुकेश कुमार और प्रभाकर कुमार ने पैक्सों में पारदर्शी लेखा संधारण तथा समय पर अंकेक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रशिक्षण के क्रम में धान अधिप्राप्ति, मुख्यमंत्री हरित कृषि संयंत्र योजना तथा बिहार राज्य फसल सहायता योजना जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी भी दी गई। जिला सहकारिता पदाधिकारी-सह-सहायक निबंधक हरेंद्र प्रसाद ने पैक्सों द्वारा पेट्रोल पंप संचालन, गोदाम निर्माण और बहुउद्देशीय सहकारी समितियों की सदस्यता बढ़ाने जैसे नवाचारों पर चर्चा की।
इसके अलावा नाबार्ड के प्रतिनिधि और सीएससी जमुई के जिला समन्वयक ने पैक्सों के कंप्यूटरीकरण और डिजिटल सशक्तिकरण से संबंधित तकनीकी जानकारी साझा की। कार्यक्रम के अंत में जिला पदाधिकारी ने सभी प्रतिनिधियों से अपील की कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को जमीन पर लागू करें, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके और सहकारी आंदोलन को नई दिशा मिल सके।

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