सिमुलतला क्षेत्र में श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ सूर्य उपासना का लोकपर्व ‘सुरजाही’
सिमुलतला/जमुई : क्षेत्र के टेलवा, लहावन, बस्तियाडीह, ढोढरी, लीलावारन सहित आसपास के गांवों में सूर्य देवता का लोकपर्व ‘सुरजाही’ श्रद्धा और भक्ति के साथ विधिवत संपन्न हुआ। रविवार की सुबह सूर्य की पहली किरण निकलने से पूर्व ही श्रद्धालुओं ने अपने-अपने घरों में पूजा की तैयारी पूरी कर ली थी। सूर्य की पहली किरण के साथ भगवान सूर्यदेव की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की गई। पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ अनुष्ठान संपन्न कराया।
स्थानीय लोगों के अनुसार ‘सुरजाही’ पर्व प्राचीन परंपरा से जुड़ा लोकअनुष्ठान है, जो वर्षों से क्षेत्र में मनाया जाता रहा है। मान्यता है कि इस पूजा से वंश वृद्धि, गोत्र की उन्नति और क्षेत्र में समृद्धि आती है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष नहीं, बल्कि पांच वर्षों के अंतराल पर मनाने की परंपरा है।
पर्व की शुरुआत शुक्रवार को ‘नहाए-खाए’ से हुई। शनिवार को खरना रखा गया और रविवार की सुबह अर्घ्य देकर अनुष्ठान का समापन किया गया। इस दौरान छठ पूजा की तर्ज पर साफ-सफाई, शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा गया। महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाए और श्रद्धालुओं ने पूजा स्थल पर हाथ जोड़कर परिवार की कुशलता, सफलता और क्षेत्र में शांति की प्रार्थना की।
आचार्य परमानन्द पांडेय ने बताया कि यह पर्व अगहन, माघ या चैत माह में मनाया जाता है और मनोकामना पूर्ण होने पर विशेष रूप से आयोजित किया जाता है। सिमुलतला क्षेत्र में यह छठ पर्व के रूप में नहीं, बल्कि सूर्य देव की आराधना के विशिष्ट लोकअनुष्ठान के रूप में प्रचलित है।
पूजा-अर्चना के उपरांत प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।


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