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Monday, February 23, 2026

Shri Ram Group of Colleges में फर्स्ट मीडिया फेस्टिवल के अंतर्गत मृत्यु-भोज पर शोध प्रस्तुति

Shri Ram Group of Colleges में फर्स्ट मीडिया फेस्टिवल के अंतर्गत मृत्यु-भोज पर शोध प्रस्तुति

🔹डॉ. अंकुर प्रकाश गुप्ता “मानव” ने रखा सामाजिक सुधार का शोधपरक दृष्टिकोण।

सिटी स्टेट ब्यूरो उत्तरप्रदेश : राजीव शर्मा/मनोज कुमार

मुजफ्फरनगर : श्री राम ग्रुप ऑफ कॉलेजेस द्वारा आयोजित फर्स्ट मीडिया फेस्टिवल 2026 के अंतर्गत कॉलेज ऑडिटोरियम में एक महत्वपूर्ण शैक्षिक एवं शोधपरक सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर “मृत्यु-भोज का सांस्कृतिक एवं संरचनात्मक अध्ययन: परंपरा, सामाजिक दबाव और सेवा-आधारित वैकल्पिक मॉडल के परिप्रेक्ष्य में” विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किया गया।

यह शोध वरिष्ठ समाजसेवी, लेखक, पत्रकार, वैकल्पिक एवं प्राकृतिक चिकित्सक तथा स्वतंत्र शोधकर्ता डॉ. अंकुर प्रकाश गुप्ता द्वारा विधिवत रूप से प्रस्तुत किया गया। अपने प्रेजेंटेशन में उन्होंने मृत्यु-भोज जैसी परंपरा का ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विश्लेषण करते हुए इसके बदलते स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि इस परंपरा की मूल भावना सामुदायिक सहभागिता, संवेदना और सामाजिक एकजुटता पर आधारित थी, किंतु समय के साथ सामाजिक प्रतिस्पर्धा और प्रतिष्ठा प्रदर्शन की प्रवृत्ति ने इसे कई बार आर्थिक बोझ में परिवर्तित कर दिया है। उन्होंने रेखांकित किया कि सामाजिक दबाव के कारण अनेक परिवार अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक व्यय करने को बाध्य हो जाते हैं, जिससे आर्थिक असंतुलन, मानसिक तनाव और ऋणग्रस्तता जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

अपने शोध के माध्यम से उन्होंने “सेवा-आधारित वैकल्पिक मॉडल” का प्रस्ताव रखा। इस मॉडल में मृत्यु-भोज के स्थान पर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, निर्धनों की सहायता, वृक्षारोपण तथा अन्य जनकल्याणकारी कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कही गई। उन्होंने उदाहरणों एवं तथ्यात्मक आंकड़ों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि यदि समाज इस दिशा में पहल करे, तो यह परंपरा सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन सकती है।

कार्यक्रम में उपस्थित प्राध्यापकगण, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने विषय की गंभीरता तथा प्रस्तुति की तार्किकता की सराहना की। प्रश्नोत्तर सत्र में भी व्यापक चर्चा हुई, जिसने इस विषय को और अधिक प्रासंगिक और विचारणीय बना दिया।

फर्स्ट मीडिया फेस्टिवल के अंतर्गत आयोजित यह शोध प्रस्तुति सामाजिक जागरूकता, वैचारिक मंथन और रचनात्मक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

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