बार काउंसिल नियमों में बदलाव की उठी मांग, युवा अधिवक्ता अभिषेक गोयल ने बताया पुरानी शर्तें अलोकतांत्रिक
सिटी स्टेट ब्यूरो उत्तरप्रदेश : राजीव शर्मा/मनोज कुमार
उत्तरप्रदेश : उत्तर प्रदेश में बार एसोसिएशनों के वार्षिक चुनावों की सरगर्मी के बीच युवा अधिवक्ताओं ने नेतृत्व से जुड़े नियमों में बदलाव की मांग तेज कर दी है। तहसील से लेकर उच्च न्यायालय स्तर तक, बार एसोसिएशनों में उम्र और लंबे अनुभव की अनिवार्य शर्त को समाप्त करने की आवाज अब संगठित रूप लेने लगी है।
खतौली तहसील में विधि व्यवसाय कर रहे युवा अधिवक्ता अभिषेक गोयल ने अध्यक्ष और महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर चुनाव लड़ने के लिए निर्धारित आयु व अनुभव की बाध्यता को अलोकतांत्रिक करार देते हुए इसे समाप्त करने की पुरजोर मांग की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में नेतृत्व का आधार केवल वर्षों का अनुभव नहीं, बल्कि कार्यक्षमता, दृष्टिकोण और संकल्प होना चाहिए।
अभिषेक गोयल ने कहा कि देशभर में युवा अधिवक्ता लंबे समय से बार एसोसिएशन और बार काउंसिल के चुनावों में वरिष्ठता के नाम पर लगाई गई कठोर शर्तों पर सवाल उठाते आ रहे हैं। उनका तर्क है कि जब देश में विधायक और सांसद बनने के लिए 25 वर्ष की आयु पर्याप्त मानी जाती है, तो बार एसोसिएशन जैसे पेशेवर संगठनों के नेतृत्व के लिए 15 से 20 वर्ष की वकालत को अनिवार्य क्यों किया गया है।
उन्होंने संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुच्छेद 84(ख) के तहत 25 वर्ष का व्यक्ति देश के सर्वोच्च विधायी संस्थानों का हिस्सा बन सकता है, तो वकीलों के संगठन का नेतृत्व करने के लिए दशकों का अनुभव मांगना युवा प्रतिभाओं के साथ अन्याय है।
अभिषेक गोयल का कहना है कि मौजूदा नियमों के कारण नए, ऊर्जावान और नवाचार सोच वाले अधिवक्ता नेतृत्व की दौड़ से बाहर हो जाते हैं। डिजिटल युग में बार एसोसिएशनों को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो तकनीक-सक्षम हो, युवा अधिवक्ताओं की समस्याओं को समझे और पेशे को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ा सके।
उन्होंने अपील की कि बार काउंसिल और संबंधित संस्थाएं समय की मांग को समझें और नियमों में आवश्यक संशोधन कर युवा अधिवक्ताओं को समान अवसर प्रदान करें, ताकि बार एसोसिएशन वास्तव में लोकतांत्रिक और प्रतिनिधिक संस्थान बन सकें।

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