"एनएच 333ए में पुलिया क्षतिग्रस्त दुर्घटना को डें रहा दावत* घोरपारन जंगल के पुलिया में ना ही सुरक्षा दीवार और ना ही सोल्डर मार्किंग
सिटी संवाददाता : मुकेश कुमार सिंह
सिमुलतला : राष्ट्रीय राज्य मार्ग 333A का सिमुलतला–झाझा मुख्य सड़क मार्ग पर घोरपारण जंगल में सड़क के नीचे बनी पुलिया क्षतिग्रस्त हो जाने से लगातार छोटी-बड़ी दुर्घटना का मामला प्रकाश में आता रहा है। कई बार सोशल मीडिया एवं अखबार ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित भी किया। इसके बावजूद संबंधित विभाग की उदासीनता चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि या तो जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या से अनजान बने हुए हैं, या फिर किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं।
इस रूट से गुजरने वाले कई वाहन चालक ने बताया कि वे गूगल मैप के सहारे इस मार्ग में प्रवेश कर गए लेकिन "एनएच 333ए" सड़क ग्रामीण सड़क से भी सँकरी है। घोरपारण जंगल में पहुंचते ही अचानक क्षतिग्रस्त पुलिया सामने आ गई कड़ी ब्रेक लगाने के बाद बालबाल सम्भल गया लेकिन अगर सामने से भी कोई बड़ी वाहन होता तो बड़ी दीर्घटना हो सकता था। अक्सर रात का समय वाहन दुर्घटना का सम्भावना बढ़ जाता है।क्षेत्र के समाज सेवी एवं बुद्धिजीवी वर्गों का कहना है कि कि विभाग भले ही इस सड़क को "एनएच 333ए" के रूप में मैप पर दिखा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। सड़क अब भी सिंगल लेन है, जिस पर भारी वाहनों का परिचालन बेहद जोखिम भरा है। घोरपारण जंगल में पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
वहीं खुरंडा गांव निवासी सोभन यादव, खुरंडा पंचायत के पूर्व मुखिया बलदेव यादव, लोहिया चौक निवासी वयोवृद्ध श्याम वर्णवाल और सिमुलतला निवासी समाजसेवी गोविंद सिंह उर्फ लाला सिंह ने बताया कि झाझा–सिमुलतला मुख्य सड़क मार्ग को करीब चार वर्ष पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग "एनएच 333ए" घोषित किया गया था। सड़क की मरम्मत तो समय-समय पर होती रही, लेकिन घोरपारण जंगल में स्थित इस पुलिया की मरम्मत वर्ष 1990 के बाद से आज तक नहीं की गई है। लंबे समय से उपेक्षा के कारण पुलिया की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। हाल में पुल में मिट्टी तो भर दिया गया है लेकिन सड़क किनारे ना ही सोल्डर मार्किंग है और ना ही पुलिया के किनारे सुरक्षा दीवार बचा है ऐसे में खतरा अब भी ज्यों का त्यों बना हुआ है।
स्थानीय लोगों और राहगीरों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि क्षतिग्रस्त पुलिया का अविलंब निर्माण कराया जाए और सड़क को सुरक्षित बनाया जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो किसी दिन यहां बड़ी दुर्घटना होना तय है, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।

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