श्रावण एकादशी से रक्षाबंधन तक अयोध्या में झूलन महोत्सव का रंग, भक्ति और उल्लास में डूबी रामनगरी - City Channel

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Friday, August 8, 2025

श्रावण एकादशी से रक्षाबंधन तक अयोध्या में झूलन महोत्सव का रंग, भक्ति और उल्लास में डूबी रामनगरी

श्रावण एकादशी से रक्षाबंधन तक अयोध्या में झूलन महोत्सव का रंग, भक्ति और उल्लास में डूबी रामनगरी

अयोध्या/उत्तरप्रदेश : सावन की हरियाली, मंद-मंद बहती पुरवाई और मंदिरों में गूंजते रस-भरे भजन… ऐसे ही मनोहारी माहौल में भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या इन दिनों झूलन महोत्सव की छटा बिखेर रही है। पूरे श्रावण मास में झूले का उत्सव चलता है, लेकिन श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी से इसकी रौनक और भक्ति अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंच जाती है। इस अवसर पर नगर के बड़े-बड़े मंदिरों में युगल सरकार झूले पर विराजमान होते हैं और भक्त झूम-झूमकर दर्शन लाभ लेते हैं।

श्री सद्गुरु बधाई भवन में भक्ति का संगम:

स्वर्गद्वार स्थित श्री सद्गुरु बधाई भवन में झूलन महोत्सव का विशेष आकर्षण देखने को मिल रहा है। पीठाधीश्वर महंत राजीवलोचन शरण महाराज के संयोजन में सजाए गए झूले पर श्री सीतारामजी विराजमान हैं। मंदिर प्रांगण में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहता है। नगर के नामचीन भजन गायक, “सियजू झूल रही बगिया में दशरथ राज कुँवर के संग”, “चलो देखि आई सिया रघुवीर झुलनवा झूल रहे”, “सावन के दिन में शौक से झूला झुलाये” जैसे पदों का गायन कर वातावरण को भक्तिमय कर रहे हैं।

गायक मंडली के स्वर और ढोलक-झांझ की ताल पर भक्तजन झूम उठते हैं। हर ओर फूलों की खुशबू, रंग-बिरंगी झालरें और रौशनी का अद्भुत समन्वय, मानो पूरा परिसर स्वर्ग सा सजा हो।

सदियों पुरानी परंपरा:

महंत राजीवलोचन शरण महाराज ने बताया कि झूलन महोत्सव की परंपरा इस मंदिर में सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। पूर्वाचार्य और गुरुजनों के आशीर्वाद से यह आयोजन लगातार होता आ रहा है। “श्रावण शुक्ल एकादशी से लेकर रक्षाबंधन तक मंदिर परिसर में यह उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, जिसमें देश के विभिन्न कोनों से भक्त आते हैं और प्रभु को झुलाने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं,” उन्होंने कहा।

देशभर से आते हैं श्रद्धालु:

झूलन महोत्सव के दिनों में अयोध्या की सड़कों और गलियों में भक्ति का अद्भुत रंग देखने को मिलता है। दूर-दूर से आए श्रद्धालु, कांवड़िए और संतगण मंदिरों में पहुंचकर झूले पर बैठे युगल सरकार के दर्शन करते हैं। कई भक्तजन तो प्रतिवर्ष सावन के इसी समय अयोध्या आने का व्रत लेते हैं।

श्रावण में अयोध्या का बदलता रूप:

श्रावण मास में अयोध्या का हर मंदिर फूलों, झालरों और रोशनी से सज जाता है। रात में दीपों की पंक्तियों के बीच झूलते भगवान का दृश्य मन को मोह लेता है। श्रीराम जन्मभूमि, हनुमानगढ़ी, कनक भवन समेत प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है।

श्रावण की एकादशी से रक्षाबंधन तक चलने वाला यह झूलन महोत्सव सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि अयोध्या की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का हिस्सा है। यहां आकर हर भक्त भक्ति-रस की ऐसी डुबकी लगाता है, जो जीवनभर स्मृतियों में बसी रहती है।

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