इलाज के दौरान युवक की मौत, डॉक्टर की बेरुखी से मानवता हुई शर्मसार
सिटी संवासदाता : ब्रह्मदेव प्रसाद यादव,
झाझा, जमुई/बिहार : खैरा प्रखंड के कोडवाडीह गांव के युवक की इलाज के दौरान मौत और डॉक्टर की बेरुखी ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। यह घटना झाझा स्थित एक निजी क्लिनिक, डॉक्टर तसलीम के यहां सामने आई, जहां इलाजरत युवक सोनू कुमार ने अचानक दिल का दौरा (हार्ट अटैक) आने से दम तोड़ दिया।
मिली जानकारी के अनुसार, सोनू अपने भाई नवीन कुमार के साथ इलाज के लिए डॉक्टर तसलीम के क्लिनिक आया था। बताया गया कि 15 दिन पहले ही सोनू के पिता की असमय मृत्यु हो चुकी थी। सोनू की तबीयत खराब होने पर उसे क्लिनिक लाया गया, जहां इलाज के दौरान डॉक्टर ने बताया कि बीपी (ब्लड प्रेशर) लो है और दवा मंगाई गई। लेकिन जब तक दवा पहुंची, तब तक सोनू ने क्लिनिक के गेट पर ही दम तोड़ दिया।
मौत के बाद मृतक की मां बदहवास होकर जमीन पर ही रोती रही और भाई नवीन कुमार पूरी तरह हताश नजर आया। इस बीच उसका मोबाइल भी बंद हो गया, जिससे वह अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर सका।
इधर, शव को गांव तक ले जाने के लिए जब एम्बुलेंस की व्यवस्था हुई तो चालक ने ₹4000 किराया मांगा। पत्रकारों के कहने पर डॉक्टर तसलीम से मदद की गुहार लगाई गई, लेकिन डॉक्टर बिना कोई सहायता किए क्लिनिक से चले गए। मजबूरन नवीन कुमार ने बिना किराया दिए शव को उसी एम्बुलेंस से गांव ले जाना पड़ा।
ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों ने डॉक्टर की इस निर्ममता और संवेदनहीनता की तीखी आलोचना की है। उनका कहना है कि जो डॉक्टर लोगों को जीवन देने वाले कहे जाते हैं, वही यदि इस तरह मुंह मोड़ लें, तो यह मानवता को शर्मसार करने वाला कृत्य है।
यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी क्लीनिकों की जिम्मेदारी पर भी कई सवाल खड़े करती है।

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