सेवाओं के स्थायीकरण को लेकर आईसीटी इंस्ट्रक्टर्स ने दिया एकदिवसीय धरना
🔹47 कर्मियों ने सौंपा ज्ञापन, डिजिटल शिक्षा में योगदान के बावजूद अब तक अस्थायी।
जमुई/बिहार : जिले के विभिन्न उच्च एवं मध्य विद्यालयों में कार्यरत आईसीटी इंस्ट्रक्टर्स ने सोमवार को जिला शिक्षा कार्यालय के समक्ष शांतिपूर्ण ढंग से एकदिवसीय धरना दिया। इस दौरान उन्होंने अपनी सेवाओं के स्थायीकरण एवं किसी उपयुक्त योजना में समायोजन की मांग सरकार से की। कार्यक्रम के अंत में कुल 47 कर्मियों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री दयाशंकर सिंह को एक ज्ञापन सौंपा, जिसकी प्रतिलिपि राज्य के वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों, शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री को भी भेजी गई है।
धरने का नेतृत्व खैरा प्रखंड के गोपालपुर मध्य विद्यालय में पदस्थापित रामकृष्ण आचार्य ने किया। उन्होंने बताया कि “आईसीटी परियोजना के तहत जिले में कार्यरत सभी 47 इंस्ट्रक्टर्स उच्च शैक्षणिक योग्यता—जैसे एमसीए, एमएससी-आईटी, बीसीए और इंजीनियरिंग—रखते हैं, इसके बावजूद इन्हें आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से अस्थायी रूप से कार्य कराया जा रहा है।”
महत्वपूर्ण कार्य, फिर भी उपेक्षा:
श्री आचार्य ने बताया कि ये इंस्ट्रक्टर्स न केवल कंप्यूटर शिक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि विभागीय डाटा एंट्री, परीक्षा पोर्टल संचालन, तकनीकी सहायता, रिपोर्टिंग से लेकर आम चुनावों में भी प्रशासन को तकनीकी सहयोग प्रदान करते हैं। बावजूद इसके उन्हें न नियमित वेतनमान प्राप्त है और न ही सेवा सुरक्षा।
सरकार से अपील:
इंस्ट्रक्टर्स ने मांग की है कि या तो उनकी सेवाओं को स्थायी किया जाए, अथवा किसी अन्य उपयुक्त योजना में समायोजित किया जाए ताकि वे मनोबल के साथ पूर्ण निष्ठा से कार्य कर सकें।
एकजुटता और शांति का संदेश:
धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। आईसीटी कर्मियों की एकजुटता और उनकी संगठनबद्ध आवाज ने यह संदेश दिया कि वे अपने अधिकारों को लेकर सजग हैं, परंतु समाधान की अपेक्षा संवैधानिक दायरे में ही रखते हैं।
स्थानीय शिक्षक संगठनों और तकनीकी समुदाय ने भी आईसीटी इंस्ट्रक्टर्स की मांगों को वाजिब बताया है और राज्य सरकार से शीघ्र ठोस पहल की मांग की है।

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