ईको ब्रिक्स से करें प्लास्टिक का बंदोबस्त, बचाएं धरती मां
🔹पर्यावरण भारती की अपील – सुधीर सिन्हा जैसे लोग बनें प्रेरणा।
पटना/बिहार : पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पर्यावरण भारती के संस्थापक राम बिलास शाण्डिल्य ने एक विशेष अपील करते हुए कहा है कि धरती मां को प्लास्टिक जैसे 'आधुनिक जिन्न' से बचाने के लिए ईको ब्रिक्स का निर्माण एक कारगर उपाय है।
उन्होंने कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक आज मानव जीवन के लिए एक गंभीर संकट बन चुका है। यह न सड़ता है, न गलता है और जलाने पर विषैली गैस छोड़ता है जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। उन्होंने चेताया कि जिस प्रकार पूर्वज तांत्रिक मंत्रों से भूत-प्रेत को बोतल में बंद करते थे, उसी तरह आज प्लास्टिक को बोतल में भरकर ईको ब्रिक्स बनाना ही इसका स्थायी समाधान है।
बदलती सोच, बदलता व्यवहार जरूरी:
शाण्डिल्य जी ने अफसोस जताया कि पहले माताएं बाजार भेजते समय कपड़े का थैला देती थीं, जबकि आज की माताएं खुद अपने बच्चों से प्लास्टिक थैलों का उपयोग करने को कहती हैं। इससे न केवल मिट्टी बंजर हो रही है, बल्कि खाद्य श्रृंखला में प्लास्टिक के कण भी प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने अपील की कि पुराने कपड़ों से थैले बनाकर उपयोग करें और प्लास्टिक का बहिष्कार करें।
सुधीर सिन्हा बने प्रेरणा स्रोत:
राजेन्द्र नगर रोड नं. 10, पटना निवासी श्री सुधीर कुमार सिन्हा, जो CDA से ऑडिटर पद से सेवानिवृत्त हैं, अपने घर पर ईको ब्रिक्स बनाकर पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। वे पुराने कपड़ों से थैले बनाकर मित्रों और समाज को निःशुल्क वितरित कर रहे हैं और पैदल व साइकिल से चलने को अपनी जीवनशैली बना चुके हैं। उनका मानना है कि यदि अधिक से अधिक लोग साइकिल का प्रयोग करें, तो पर्यावरण के साथ-साथ स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।
पर्यावरण भारती की टीम सक्रिय:
इस मुहिम में अजय कुमार, हिमालय कुमार, कार्तिक मल्लिक, बद्रीनाथ, सोमनाथ, अजीत कुमार सिन्हा, शिक्षक अरविंद कुमार सहित कई पर्यावरणप्रेमी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
शाण्डिल्य ने कहा कि अब समय आ गया है जब हमें पर्यावरण संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बनानी होगी। एक ईको ब्रिक और एक कपड़े का थैला धरती को प्लास्टिक के दंश से बचा सकता है।

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