"सहकारिता में सहकार" विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन, सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने किया उद्घाटन
सिटी संवाददाता : प्रो. रामजीवन साहु
जमुई : जमुई जिले में सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारी समितियों की भूमिका को मजबूत करने के उद्देश्य से, शुक्रवार को एक दिवसीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम "अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025" के उपलक्ष्य में सहकारिता विभाग, बिहार सरकार द्वारा संचालित "सहकारिता में सहकार" अभियान के अंतर्गत आयोजित हुआ।
इस कार्यशाला का उद्घाटन बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने किया। उद्घाटन सत्र में उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि सहकारिता आंदोलन के माध्यम से गांवों में आत्मनिर्भरता लाई जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार किसानों को सशक्त करने के लिए कई स्तरों पर योजनाएं चला रही है। मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि सहकारी संस्थाएं अगर सही तरीके से संचालित हों तो ये ग्रामीण भारत की रीढ़ बन सकती हैं। उन्होंने बैंकिंग, बीमा, कृषि, मत्स्य पालन एवं डेयरी क्षेत्रों में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
मुख्य उपलब्धियां और घोषणाएं :
🔹 रबी 2023-24 के तहत 46 किसानों को फसल सहायता राशि का डमी चेक प्रदान किया गया।
🔹 गरसंडा पैक्स (जमुई प्रखंड) में जमा वृद्धि अभिकर्ता (DMA) की शुरुआत की गई, जिससे ग्रामीण स्तर पर बैंकिंग सेवाएं सुलभ होंगी।
🔹 इस मौके पर गरसंडा पैक्स अध्यक्ष को माइक्रो एटीएम मशीन भी सौंपी गई।
🔹 मुंगेर-जमुई केंद्रीय सहकारी बैंक द्वारा 13 किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की चेकबुक एवं पासबुक किसानों को वितरित की गई।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति :
इस कार्यशाला में सहकारिता क्षेत्र के तमाम प्रमुख पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे, जिनमें सहकारिता मंत्री, बिहार सरकार डॉ. प्रेम कुमार, मुंगेर-जमुई केंद्रीय सहकारी बैंक की अध्यक्ष श्रीमती मिंटू देवी, उपाध्यक्ष श्रीकांत यादव, पूर्व अध्यक्ष श्री बिनोद सिंह, निदेशक श्री मुकेश यादव और श्री शंकर यादव, संयुक्त निबंधक (सहकारिता समिति लिमिटेड) श्री मुकेश कुमार, जिला सहकारिता पदाधिकारी, जमुई मो. आकिब जावेद, जमुई भाजपा जिलाध्यक्ष – प्रो. दुर्गा प्रसाद केशरी, डीसीसीबी मुंगेर की अध्यक्षा व प्रबंध निदेशक, जिला अंकेक्षण पदाधिकारी, सभी सहकारिता प्रसार पदाधिकारी, और विभिन्न सहकारी समितियों के अध्यक्ष/प्रबंधक शामिल रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य :
यह कार्यशाला किसानों, दुग्ध उत्पादकों, व्यापारियों, मत्स्यजीवियों एवं अन्य सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को सहकारिता के माध्यम से स्वावलंबन की दिशा में प्रशिक्षित करना और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना था।


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