छठ पर्व से पहले तमकुलिया गांव में वस्त्र वितरण योजना की शुरुआत, स्थानीय हस्तशिल्प को बाजार से जोड़ने की पहल
🔸जिला प्रशासन ने साड़ी, धोती और चादर का किया वितरण, अधिकारियों ने पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों का लिया जायजा।
सिटी संवाददाता : प्रो० रामजीवन साहू की रिपोर्ट।
जमुई। छठ महापर्व के अवसर पर स्थानीय परंपराओं और ग्रामीण हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने विशेष पहल की है। जिला पदाधिकारी के निर्देश पर शनिवार को बरहट प्रखंड के तमकुलिया गांव में समाज कल्याण विभाग की वस्त्र वितरण योजना का शुभारंभ किया गया। इस दौरान सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग काजोल मोदी ने ग्रामीणों के बीच साड़ी, धोती एवं चादर का वितरण किया।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने तमकुलिया गांव की पारंपरिक हस्तशिल्प कला का भी जायजा लिया। उल्लेखनीय है कि यह गांव सूप, डलिया, दौरा और सजावटी सामान सहित विभिन्न पारंपरिक वस्तुओं के निर्माण के लिए जाना जाता है। यहां के कारीगर पीढ़ियों से इन सामग्रियों का निर्माण करते आ रहे हैं। छठ महापर्व में अर्घ्य देने और पूजन सामग्री सजाने में इन हस्तनिर्मित वस्तुओं का विशेष महत्व है।
इस अवसर पर जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक शुभम कुमार भी मौजूद रहे। उन्होंने गांव का स्थलीय निरीक्षण कर स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों की जानकारी ली। साथ ही इन हस्तशिल्प उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने, उनकी पहचान बढ़ाने और कारीगरों के लिए रोजगार एवं आजीविका के बेहतर अवसर विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया।
जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य स्थानीय हस्तशिल्प को केवल सांस्कृतिक विरासत तक सीमित न रखकर उसे आर्थिक उन्नति का माध्यम बनाना है। प्रशासन का प्रयास है कि तमकुलिया जैसे गांवों में पीढ़ियों से संरक्षित पारंपरिक हुनर को नई पहचान मिले और स्थानीय कारीगरों को उनके उत्पादों का बेहतर बाजार उपलब्ध हो सके।
इस पहल से छठ महापर्व के माध्यम से स्थानीय लोकसंस्कृति, पारंपरिक कला और ग्रामीण आजीविका को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

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