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Wednesday, September 2, 2026

थानेदार ने खुद संभाली सरकारी गाड़ी की स्टेयरिंग, रिटायर चौकीदार को घर छोड़कर पेश की मिसाल

थानेदार ने खुद संभाली सरकारी गाड़ी की स्टेयरिंग, रिटायर चौकीदार को घर छोड़कर पेश की मिसाल

▪️25 साल पुलिस विभाग में सेवा देने वाले रामाशंकर पासवान की विदाई पर भावुक कर देने वाला सम्मान, बोली तस्वीर—पद नहीं, इंसानियत बड़ी है।

जमुई,  1 सितंबर 2026 : सोमवार देर शाम बरहट थाना परिसर में आयोजित सेवानिवृत्ति समारोह के बाद एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने सड़क पर मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बरहट थानाध्यक्ष कुमार संजीव ने 25 वर्षों तक पुलिस विभाग में चौकीदार के रूप में सेवा देने वाले रामाशंकर पासवान को सम्मानपूर्वक उनके घर पहुंचाने के लिए खुद सरकारी वाहन की ड्राइविंग सीट संभाल ली।

बरहट थाना क्षेत्र के नुमर महाल निवासी रामाशंकर पासवान करीब 25 वर्षों तक पुलिस विभाग में चौकीदार के पद पर अपनी सेवाएं देते रहे। सोमवार को उनकी सेवानिवृत्ति पर थाना परिसर में विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मियों ने उन्हें माला पहनाकर एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके लंबे सेवाकाल और योगदान की सराहना की।

समारोह समाप्त होने के बाद आमतौर पर जहां सेवानिवृत्त कर्मी अपने साधन से घर लौटते हैं, वहीं थानाध्यक्ष कुमार संजीव ने अलग मिसाल पेश की। उन्होंने स्वयं सरकारी वाहन चलाया और रामाशंकर पासवान को बगल की सीट पर बैठाकर उनके घर के लिए रवाना हुए।

जब सरकारी वाहन रामाशंकर पासवान के दरवाजे पर पहुंचा और परिजनों ने देखा कि गाड़ी खुद थानाध्यक्ष चला रहे हैं, तो वे भी हैरान रह गए। थानाध्यक्ष ने उन्हें सम्मानपूर्वक वाहन से उतारा और घर तक पहुंचाया।

रामाशंकर के परिजनों ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक चौकीदार की सेवानिवृत्ति पर थानाध्यक्ष स्वयं वाहन चलाकर उन्हें घर छोड़ने आएंगे। उनके लिए यह सम्मान किसी बड़े पुरस्कार से कम नहीं था।

थानाध्यक्ष कुमार संजीव ने कहा, “मैंने कुछ नहीं किया। यह मेरा कर्म है और मैंने अपनी वर्दी का फर्ज निभाया है।” उन्होंने रामाशंकर पासवान को सज्जन और शालीन व्यक्ति बताते हुए उनके स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन की कामना की।

सोमवार की रात बरहट में थानेदार की ड्राइविंग सीट और रिटायर चौकीदार की बगल वाली सीट ने सम्मान और इंसानियत की एक ऐसी तस्वीर पेश की, जिसका संदेश साफ था—पद भले छोटा-बड़ा हो, सम्मान में कोई फर्क नहीं होना चाहिए।

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