एससी-एसटी अत्याचार मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, पीड़ितों को समय पर मिले न्याय और सहायता
▪️ डीएम की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय समिति की बैठक, 138 पीड़ितों को राहत राशि और 23 पेंशन मामलों का हुआ निष्पादन।
सिटी संवाददाता : प्रो० रामजीवन साहू की रिपोर्ट।
जमुई, 13 अगस्त : अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की समीक्षा बैठक 12 अगस्त को जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक में अत्याचार से जुड़े मामलों की स्थिति, पीड़ितों को उपलब्ध कराई जा रही राहत और लंबित मामलों के निष्पादन की समीक्षा की गई।
बैठक में सिकंदरा विधायक प्रफुल्ल कुमार मांझी, पुलिस अधीक्षक, उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला कल्याण पदाधिकारी समेत समिति के अन्य सदस्य शामिल हुए।
27 एफआईआर और 111 चार्जशीट स्तर के पीड़ितों को मिली राहत
बैठक में जिला कल्याण पदाधिकारी ने बताया कि पिछली त्रैमासिक अवधि से अब तक एफआईआर स्तर के 27 पीड़ितों और चार्जशीट स्तर के 111 पीड़ितों को नियमानुसार राहत राशि का भुगतान किया जा चुका है। कुल मिलाकर 138 पीड़ितों को निर्धारित सहायता राशि उपलब्ध कराई गई है।
वहीं पेंशन से जुड़े सभी 23 मामलों का निष्पादन कर जुलाई 2026 तक की पेंशन राशि का भुगतान भी कर दिया गया है।
न्यायालय में लंबित मामलों में तेजी लाने का निर्देश
जिला पदाधिकारी ने बैठक में स्पष्ट किया कि पीड़ित परिवारों को समय पर न्याय और सरकारी सहायता उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। उन्होंने विशेष लोक अभियोजक को न्यायालय में लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाने का निर्देश दिया।
उन्होंने जिला कल्याण पदाधिकारी को पीड़ित परिवारों से लगातार संपर्क और समन्वय बनाए रखने तथा अधिनियम के तहत देय राहत राशि का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने को कहा।
लंबित चार्जशीट पर एसपी ने दिए निर्देश
पुलिस अधीक्षक ने संबंधित थानों में लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर आरोप पत्र यानी चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों को मामलों के अनुसंधान में अनावश्यक विलंब से बचने को कहा।
बैठक में अधिकारियों ने एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामलों के त्वरित निष्पादन, पीड़ितों को समय पर राहत उपलब्ध कराने और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करने पर जोर दिया।

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