हूल दिवस पर गरजे विस्थापित किसान, 'हक मिले बिना नहीं छोड़ेंगे अपनी जमीन'
▪️भाकपा माले की 75 किलोमीटर पदयात्रा दूसरे दिन जमुई पहुंची, पुनर्वास, पांच गुना मुआवजा और रोजगार की मांग।
जमुई : हूल दिवस के अवसर पर बरनार जलाशय परियोजना एवं राष्ट्रीय राजमार्ग-333ए से प्रभावित किसानों ने मंगलवार को अपने अधिकारों की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। भाकपा माले, आदिवासी संघर्ष मोर्चा और अखिल भारतीय किसान महासभा के नेतृत्व में निकली 75 किलोमीटर की पदयात्रा दूसरे दिन विभिन्न गांवों से होते हुए जमुई कचहरी चौक पहुंची, जहां सभा आयोजित कर सरकार के समक्ष सात सूत्री मांगें रखी गईं।
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले के बिहार राज्य कमेटी सदस्य बाबू साहब सिंह ने कहा कि हूल दिवस जल, जंगल और जमीन की रक्षा के संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बरनार जलाशय निर्माण से सैकड़ों किसान परिवारों के घर, खेत और आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। सरकार यदि भूमि अधिग्रहण करना चाहती है तो पहले विस्थापित परिवारों के पुनर्वास, जमीन के बदले जमीन, रोजगार और सम्मानजनक मुआवजे की गारंटी दे। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर सहमति बनने तक किसान अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे।
भाकपा माले के जिला सचिव शंभू शरण सिंह ने कहा कि यह पदयात्रा किसानों के लंबे संघर्ष की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि जब तक किसानों को उनका अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन लगातार जारी रहेगा। किसानों ने बरनार जलाशय से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, एनएच-333ए के लिए अधिग्रहित भूमि का वर्तमान एमवीआर के आधार पर पांच गुना मुआवजा, विस्थापित परिवारों को नौकरी, वनाधिकार कानून के तहत लंबित दावों का निष्पादन तथा भूमिहीन परिवारों को आवासीय भूमि उपलब्ध कराने की मांग दोहराई।
सभा में अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला सचिव मनोज कुमार पांडेय, संजय राय, वासुदेव राय, कंचन रजक, प्रदीप मंडल, अजीब अंसारी, सलीम अंसारी, वासुदेव हांसदा, जयराम तुरी, मो. हैदर, ब्रह्मदेव ठाकुर, किरण गुप्ता सहित बड़ी संख्या में किसान और महिला प्रतिभागी उपस्थित रहे। किसानों ने सरकार से शीघ्र वार्ता कर मांगों का समाधान निकालने की अपील की।

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