जमुई के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण एवं जैव-प्रौद्योगिकी जागरूकता को लेकर व्यापक सर्वेक्षण शुरू
- सामाजिक संस्था मिलेनियम स्टार फाउंडेशन के मार्गदर्शन में हो रहा है सर्वे
- देव भूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के छात्र अभिषेक कर रहे हैं नेतृत्व
- ग्रामीण विकास एवं सामाजिक उत्थान की दिशा में साबित होगा महत्वपूर्ण कदम : ई. प्रशांत
जमुई : ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता एवं जैव-प्रौद्योगिकी के प्रति लोगों की जागरूकता का आकलन करने के उद्देश्य से जमुई जिले के विभिन्न पंचायतों और गांवों में व्यापक सर्वेक्षण अभियान शुरू किया गया है। यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत सामाजिक संस्था मिलेनियम स्टार फाउंडेशन के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। सर्वेक्षण कार्य का नेतृत्व देव भूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी, देहरादून के बीएससी (ऑनर्स) बायोटेक्नोलॉजी के छात्र अभिषेक कुमार तिवारी द्वारा इंटर्नशिप कार्यक्रम के अंतर्गत किया जा रहा है। इस दौरान ग्रामीण परिवारों से स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, पोषण संबंधी स्थिति, स्वच्छता के प्रति जागरूकता, टीकाकरण, पेयजल व्यवस्था, डिजिटल साक्षरता तथा कृषि में जैव-प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसे विभिन्न विषयों पर जानकारी एकत्र की जा रही है। सर्वेक्षण के तहत ग्रामीणों से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और जागरूकता के स्तर को समझने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही तकनीकी जागरूकता, सोशल मीडिया उपयोग, डिजिटल भुगतान एवं साइबर सुरक्षा से संबंधित जानकारियां भी जुटाई जा रही हैं, ताकि ग्रामीण समाज में डिजिटल परिवर्तन की स्थिति का भी आकलन किया जा सके। अभिषेक कुमार तिवारी ने बताया कि इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को समझना तथा स्वास्थ्य, पोषण और विज्ञान आधारित जागरूकता कार्यक्रमों के लिए तथ्यात्मक आधार तैयार करना है। सर्वेक्षण के दौरान प्रतिभागियों की पूर्व सहमति प्राप्त कर उनकी व्यक्तिगत जानकारी को पूर्णतः गोपनीय रखा जा रहा है। मिलेनियम स्टार फाउंडेशन के उपाध्यक्ष ई. प्रशांत कुमार ने बताया कि सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में जनजागरूकता, स्वास्थ्य शिक्षा, पोषण सुधार तथा वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। यह पहल ग्रामीण विकास एवं सामाजिक उत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यह सर्वेक्षण एक माह तक चलेगा। जिसके बाद उसी आधार पर रिपोर्ट जारी किया जाएगा। ग्रामीणों ने भी इस सर्वेक्षण में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए इसे समाजहित में उपयोगी पहल बताया और भविष्य में ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।

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