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Thursday, June 4, 2026

रावणेश्वर हॉल के जीर्णोद्धार से जमुई के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की शुरुआत

रावणेश्वर हॉल के जीर्णोद्धार से जमुई के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की शुरुआत

🔻उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने किया उद्घाटन, हर सप्ताह होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम।

सिटी संवाददाता : प्रो० रामजीवन साहू की रिपोर्ट

जमुई : जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान रहे रावणेश्वर हॉल का जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद गुरुवार को बिहार सरकार की उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने इसका विधिवत उद्घाटन किया। वर्ष 1939 में स्थापित यह हॉल लंबे समय से जमुई की बौद्धिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। इसके पुनरुद्धार को जिले के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि अपने पूर्वजों के नाम से जुड़े इस ऐतिहासिक भवन की जर्जर स्थिति देखकर उन्हें हमेशा पीड़ा होती थी। उन्होंने कहा कि इस धरोहर को पुनर्जीवित करने की इच्छा लंबे समय से उनके मन में थी। उन्होंने जिला प्रशासन, विशेषकर जिला पदाधिकारी नवीन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अब यह भवन अपनी नई भव्यता के साथ लोगों के सामने है।

मंत्री ने बताया कि आने वाले समय में रावणेश्वर हॉल परिसर का और अधिक सौंदर्यीकरण किया जाएगा। साथ ही युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए जिले के स्टेडियमों और खेल मैदानों की मरम्मत भी कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जमुई को खेल और उद्योग के क्षेत्र में नई पहचान दिलाना उनकी प्राथमिकता है, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें और पलायन की समस्या कम हो।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए जिला पदाधिकारी नवीन ने कहा कि जिले में लंबे समय से एक आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त सांस्कृतिक केंद्र की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जो अब पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज का विकास केवल भौतिक संसाधनों से नहीं होता, बल्कि बौद्धिक और सांस्कृतिक चेतना का विकास भी उतना ही आवश्यक है।

जिला पदाधिकारी ने घोषणा की कि स्थानीय कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने और परिसर को हमेशा जीवंत बनाए रखने के लिए अब प्रत्येक शनिवार अथवा रविवार को रावणेश्वर हॉल में नियमित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे जिले के कलाकारों, साहित्यकारों और रंगकर्मियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।

कार्यक्रम में जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा साहित्यकारों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों तथा बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने रावणेश्वर हॉल के जीर्णोद्धार को जमुई की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।

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