अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 25 वर्षों बाद हुआ आशा कार्यकर्ता का चयन, गुरमाहा और चोरमारा गांवों में पहली बार स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई मजबूती
सिटी ब्यूरो रिपोर्ट : राजीव रंजन/राकेश कुमार
जमुई : जिले के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों गुरमाहा और चोरमारा गांवों में 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आशा कार्यकर्ता (आशा दीदी) का चयन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।
जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) वर्ष 2005 से संचालित है, लेकिन दुर्गम और नक्सल प्रभावित होने के कारण इन क्षेत्रों में अब तक आशा कार्यकर्ता का चयन नहीं हो पाया था। गुरुवार को दोनों गांवों में चयन प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की गई।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे निचली और महत्वपूर्ण कड़ी होती हैं। इनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं की देखभाल, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, पोषण, परिवार नियोजन तथा विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाती है।
स्थानीय ग्रामीणों ने आशा कार्यकर्ता के चयन को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इससे गांव के लोगों को पहली बार स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी सुविधाओं का लाभ बेहतर तरीके से मिल सकेगा। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य में इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।
प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ी सफलता बताया है। ग्रामीणों ने भी आशा व्यक्त की कि आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति से स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकेगा।


No comments:
Post a Comment