झाझा में छापेमारी, एक बाल श्रमिक मुक्त: नियोजक पर प्राथमिकी दर्ज
झाझा/जमुई : जिला पदाधिकारी श्री नवीन के मार्गदर्शन एवं श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के निर्देश पर श्रम प्रशासन की टीम ने झाझा प्रखंड में विशेष छापेमारी अभियान चलाकर एक बाल श्रमिक को मुक्त कराया।
इस दौरान नियोजक के खिलाफ बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम 1986 की धारा 3 एवं 14(1) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
श्रम अधीक्षक रतीश कुमार के नेतृत्व में गठित धावा दल ने पुलिस बल के सहयोग से कार्रवाई को अंजाम दिया। श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी ने बताया कि बाल श्रम के खिलाफ यह विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
श्रम अधीक्षक ने कहा कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों तथा 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों को जोखिमपूर्ण कार्यों में नियोजित करना कानूनन अपराध है। यदि किसी दुकान, प्रतिष्ठान, फैक्ट्री, ढाबा, मोटर गैराज, ईंट भट्ठा या अन्य स्थानों पर बाल श्रमिक पाए जाते हैं तो संबंधित नियोजकों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि राज्य में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। बाल श्रमिकों को मुक्त कराने के बाद उन्हें आर्थिक सहायता, पुनर्वास, शिक्षा एवं अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार नियोजकों से प्रति बाल श्रमिक 20 हजार रुपये जिला बाल श्रमिक पुनर्वास कोष में जमा कराए जाते हैं, जबकि योग्य बाल श्रमिकों को तत्काल सहायता के रूप में 3 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं।
इसके अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से 14 वर्ष से कम आयु के विमुक्त बाल श्रमिकों को 25 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है। अब 14 से 18 वर्ष के किशोर श्रमिकों को भी निर्धारित शर्तों के तहत समान लाभ दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
श्रम विभाग ने सभी नियोजकों से बाल श्रम नहीं कराने संबंधी शपथ पत्र संयुक्त श्रम भवन में जमा करने तथा दुकानों एवं प्रतिष्ठानों का श्रम विभाग में पंजीकरण कराने की अपील की है।
साथ ही सभी ठेकेदारों को ठेका श्रम लाइसेंस रखने का निर्देश दिया गया है। विभाग ने भीषण गर्मी एवं लू को देखते हुए श्रमिकों के लिए पेयजल और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी अपील की है।


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