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Monday, May 11, 2026

स्व. राजेश्वरी प्रसाद सिंह स्मृति प्रतिभा सम्मान समारोह में मेधावियों का हुआ सम्मान

स्व. राजेश्वरी प्रसाद सिंह स्मृति प्रतिभा सम्मान समारोह में मेधावियों का हुआ सम्मान

- शिक्षा, संस्कार और प्रतिभा के संगम का बना साक्षी गिद्धौर

- मुख्य और विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे डीयू के प्रोफेसर 

- विद्वानों ने गुरु-शिष्य परंपरा और सामाजिक शिक्षा व्यवस्था पर डाला प्रकाश

गिद्धौर/जमुई : प्रखंड क्षेत्र में शिक्षा और प्रतिभा को सम्मान देने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए रविवार को स्व. राजेश्वरी प्रसाद सिंह (अधिवक्ता) स्मृति तृतीय प्रतिभा सम्मान समारोह का भव्य आयोजन मिलेनियम स्टार फाउंडेशन के सौजन्य से किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। 

समारोह में शिक्षा, साहित्य, संस्कृति एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई प्रतिष्ठित विद्वानों की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं भारतीय शिक्षण मंडल के सह मंत्री डॉ. आशुतोष तिवारी रहे। 

वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्राध्यापक एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के प्रांत कार्यकारिणी सदस्य दीपांशु पाठक, मुंगेर विश्वविद्यालय के मानवीकीय संकायाध्यक्ष प्रो. भवेशचन्द्र पाण्डेय, सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. लखनलाल पाण्डेय तथा वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक नवीन पांडेय उपस्थित रहे। 

सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों को प्रेरणादाई संबोधन देते हुए शिक्षा के महत्व और संस्कारयुक्त जीवन की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्य अतिथि डॉ. आशुतोष तिवारी ने अपने संबोधन में भारतीय गुरुकुल परंपरा, निःशुल्क शिक्षा व्यवस्था और गुरु-शिष्य संबंधों की महत्ता को विस्तार से रखा। 

उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में मठ, मंदिर और शिवालय शिक्षा के प्रमुख केंद्र हुआ करते थे, जहाँ समाज के सहयोग से विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती थी। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप अत्यधिक व्यक्ति केंद्रित हो गया है, जिसके कारण शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य और सामाजिक सरोकारों में बाधा उत्पन्न हो रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का आह्वान किया।

 विशिष्ट अतिथि दीपांशु पाठक ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की अमर कृति रश्मिरथी की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जो व्यक्ति जीवन में बड़ा बनना चाहता है, उसे पहले योग्य बनना पड़ता है। समाज और परिस्थितियाँ व्यक्ति की परीक्षा लेकर ही उसे नायक के रूप में स्थापित करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संघर्ष, अनुशासन और निरंतर अध्ययन को सफलता का मूल मंत्र बताया।

 समारोह में सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. लखनलाल पाण्डेय को शिक्षा के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के आलोक में आजीवन उत्कृष्टता सम्मान से सम्मानित किया गया। साथ ही प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को मंच पर सम्मानित कर प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्र एवं पाठ्य सामग्री प्रदान किए गए। 

आयोजन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करना तथा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को पहचान और प्रोत्साहन देना बताया गया। कार्यक्रम के आयोजक उत्तम कुमार ने स्वागत भाषण देते हुए समारोह की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि उनके दादाजी स्व. राजेश्वरी प्रसाद सिंह की स्मृति में पिछले तीन वर्षों से यह सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है। 

इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज को नई दिशा देने का सबसे सशक्त माध्यम है।  समारोह का संचालन आयोजन समिति के संयोजक एवं शिक्षक आशीष कुमार पांडेय तथा मिलेनियम स्टार फाउंडेशन के अध्यक्ष सुशांत साईं सुंदरम ने संयुक्त रूप से किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अभय कुमार पांडेय ने किया। 

कार्यक्रम की एक विशेष उपलब्धि यह भी रही कि केवल विद्यार्थियों को सम्मानित करने तक ही आयोजन सीमित नहीं रहा, बल्कि साहित्य, शिक्षा और सामाजिक चेतना से जुड़े विद्वानों की सहभागिता ने इसे एक वैचारिक मंच का स्वरूप प्रदान किया। सांस्कृतिक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियों ने समारोह को और अधिक आकर्षक एवं प्रेरणादाई बना दिया।

 इस अवसर पर धार्मिक एवं सांस्कृतिक योगदान के रूप में महाभारत के संपूर्ण छह खंड बाबा कोकिलचंद मंदिर के पुस्तकालय को भेंट किए गए। आयोजन में विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षा का अलख जगाने वाले शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया, जिससे समारोह में उपस्थित लोगों में विशेष उत्साह देखा गया।

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