जमुई-सोनो मार्ग के दो पुल बंद, हजारों लोगों की बढ़ी मुश्किलें; 20 किलोमीटर लंबा हुआ सफर
🔻नरियाना और मांगोबंदर पुल क्षतिग्रस्त होने से यातायात ठप, शहरों में बढ़ा जाम; ग्रामीण बोले- हर चुनाव में मिलता है सिर्फ आश्वासन।
जमुई : जमुई-सोनो मार्ग पर स्थित नरियाना और मांगोबंदर के दो प्रमुख पुलों के क्षतिग्रस्त होने के बाद प्रशासन ने एहतियातन दोनों पुलों पर छोटे और बड़े सभी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी है। पुलों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है, जिससे आसपास के कई दर्जन गांवों के लोगों के साथ-साथ झारखंड और पश्चिम बंगाल जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पुल बंद होने के कारण अब बाहरी वाहनों को जमुई मुख्यालय, गिद्धौर, झाझा, सोनो होते हुए चकाई मार्ग से होकर गुजरना पड़ रहा है। इस वैकल्पिक मार्ग से यात्रियों को करीब 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और ईंधन दोनों की खपत बढ़ गई है।
इधर, पुल बंद होने के बाद जमुई शहर, सिकंदरा, खैरा, गिद्धौर, झाझा और सोनो में लगातार जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य बाजारों में भारी वाहनों का दबाव बढ़ने से घंटों तक जाम लग रहा है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
जानकारी के अनुसार जिले में आवागमन के लिए तीन प्रमुख मार्गों का उपयोग होता था। पहला मुख्य मार्ग जमुई-गिद्धौर-झाझा-सोनो-चकाई होकर झारखंड और पश्चिम बंगाल तक जाता है। दूसरा शॉर्टकट मार्ग जमुई-खैरा-नरियाना-मांगोबंदर होकर सीधे सोनो तक पहुंचता था, जिससे 20 से 30 किलोमीटर दूरी कम हो जाती थी।
वहीं तीसरा मार्ग जमुई से गरसंडा-दाबिल होकर गिद्धौर तक जाता है, लेकिन वर्तमान में उस सड़क की हालत बेहद खराब है। सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बने हुए हैं, जिससे यह मार्ग भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार करीब दस वर्ष पहले बने ये दोनों पुल निर्माण के एक-दो वर्ष बाद ही क्षतिग्रस्त होने लगे थे। लंबे समय से पुल जर्जर अवस्था में पड़े थे। हाल के दिनों में दुर्घटना की आशंका बढ़ने के बाद प्रशासन ने दोनों पुलों को पूरी तरह बंद कर दिया, जिससे जमुई से सोनो जाने वाला छोटा बायपास मार्ग पूरी तरह ठप हो गया है।
दोनों वैकल्पिक रास्तों के खराब या बंद होने से ग्रामीण इलाकों की परेशानी और बढ़ गई है। कई गांवों के लोग अब पैदल आवागमन करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हर चुनाव के समय नेताओं द्वारा पुलों की मरम्मत या नए पुल निर्माण का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।
इधर, हाल ही में नरियाना पुल के क्षतिग्रस्त होने की सूचना पर सांसद Arun Bharti ने स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि पुल की स्थिति काफी खतरनाक हो चुकी थी और किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर आवाजाही बंद की है। सांसद ने बताया कि 4 से 5 जून तक कॉजवे यानी अस्थायी पुल निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिल सकेगी।

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