बाल विवाह की रोकथाम को लेकर प्रशासन सख्त, जिलाधिकारी ने जागरूकता रथ को दिखाई हरी झंडी, गांव-गांव पहुंचेगा संदेश
जमुई : बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से मंगलवार को जिला प्रशासन की ओर से एक महत्वपूर्ण पहल की गई। जिला पदाधिकारी जमुई श्री नवीन ने समाहरणालय परिसर से बाल विवाह के विरुद्ध जन-जागरूकता फैलाने हेतु विशेष जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी श्री नवीन ने कहा कि बाल विवाह न केवल एक सामाजिक बुराई है, बल्कि यह कानूनन अपराध भी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बाल विवाह बच्चों, विशेषकर बालिकाओं के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है।
जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है। इस कानून का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने अभिभावकों और समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे कानून का पालन करते हुए बाल विवाह को पूरी तरह समाप्त करने में सहयोग करें।
जागरूकता रथ के माध्यम से जिले के गांव-गांव, टोला-मोहल्लों में जाकर लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों तथा बाल संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी। रथ पर आकर्षक बैनर, पोस्टर, जागरूकता स्लोगन एवं ध्वनि संदेश लगाए गए हैं, ताकि आमजन तक प्रभावी तरीके से संदेश पहुंचाया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान यह भी अपील की गई कि यदि कहीं बाल विवाह की सूचना मिले तो लोग बिना झिझक चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अथवा संबंधित प्रशासन को तुरंत सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।
इस मौके पर उप विकास आयुक्त, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, उप समाहर्ता, महिला एवं बाल विकास अधिकारी, शिक्षा विभाग के पदाधिकारी, पुलिस प्रशासन के प्रतिनिधि, स्वयंसेवी संस्था तटवासी समाज न्यास के कार्यकर्ता, शिक्षकगण एवं स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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