मौरा बालू घाट में अवैध खनन के खिलाफ किसानों का धरना सातवें दिन भी जारी, विभिन्न दलों का समर्थन
गिद्धौर/जमुई : मौरा बालू घाट में कथित अवैध खनन के विरोध में वन पर्यावरण संरक्षण समिति के सचिव एवं भाकपा (माले) नेता बाबू साहब सिंह के नेतृत्व में आधा दर्जन से अधिक गांवों के सैकड़ों ग्रामीण किसानों का अनिश्चितकालीन धरना सातवें दिन भी जारी रहा। आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है।
धरना स्थल पर पहुंचकर आईआईपी पार्टी के जिलाध्यक्ष शंभू कुमार ने किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि मौरा बालू घाट की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि रिपोर्ट को दबाव में रोक कर रखा गया है तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसानों के मुद्दे को विधानसभा स्तर तक उठाएगी।
भाकपा (माले) नेता बाबू साहब सिंह ने कहा कि वर्ष 2018 में मौरा बालू घाट की बंदोबस्ती किसानों के आंदोलन और प्रशासनिक अनुशंसा के आधार पर रद्द की गई थी। उनका आरोप है कि पूर्व तथ्यों को नजरअंदाज कर पुनः बंदोबस्ती की गई है, जिससे पर्यावरण और किसानों की खेती प्रभावित हो सकती है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।
पूर्व प्रमुख सरवन यादव ने कहा कि प्रशासन को किसानों की चिंताओं का समाधान करना चाहिए और बालू घाट से संबंधित जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
गिधौर पंचायत के पूर्व मुखिया दिलीप दास ने भी धरना को समर्थन दिया। इस अवसर पर अशोक सिंह, सरपंच अवधेश सिंह, अनिल रावत, रामानंद दुबे, रामप्रवेश रावत, सुबोध यादव, विक्रम यादव, अजय सिंह, गिरीश झा, सचिता रावत, मनीष रावत, मुकेश रावत, प्रकाश रावत, टुनटुन सिंह, प्रकाश साह, कुमोद सिंह सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे।
धरनार्थियों ने प्रशासन से मांग की है कि मौरा बालू घाट की बंदोबस्ती एवं खनन कार्य की पारदर्शी जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि किसानों की आशंकाओं का समाधान हो सके और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

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