मौरा बालू घाट में अवैध उत्खनन के खिलाफ आंदोलन तेज, दूसरे दिन भाकपा माले ने दिया समर्थन
जमुई : मौरा बालू घाट में कथित अवैध बालू उत्खनन के विरोध में बन संरक्षण समिति के नेतृत्व में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन और उग्र हो गया। आंदोलन को भाकपा माले का समर्थन मिला। धरना स्थल पर पार्टी के युवा नेता बाबू साहब सिंह ने किसानों के साथ एकजुटता जताते हुए प्रशासन और बंदोबस्तधारियों पर गंभीर आरोप लगाए।
बाबू साहब सिंह ने कहा कि मौरा बालू घाट में अवैध उत्खनन को लेकर जो दस्तावेज दिखाकर किसानों को गुमराह किया जा रहा है, उसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 की नियमावली के तहत ई-बिडिंग के माध्यम से हुई बंदोबस्ती को लेकर किसानों ने पहले भी आंदोलन किया था। इस मामले में पटना उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर जमुई अनुमंडल अधिकारी की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय समिति—जिसमें खनन विभाग एवं लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता शामिल थे—ने संयुक्त निरीक्षण कर जांच प्रतिवेदन (पत्रांक 419, दिनांक 07-06-2018) सौंपा था।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि मौरा बालू घाट में उत्खनन होने से नदी का तल रीचार्ज/इनटेक लेवल से नीचे चला जाएगा, जिससे खेतों तक पानी की पहुंच प्रभावित होगी और हजारों एकड़ कृषि भूमि बंजर होने का खतरा पैदा होगा। इसी आधार पर बंदोबस्ती रद्द करने की अनुशंसा की गई थी। बावजूद इसके, आरोप है कि आज फिर कुछ सफेदपोश नेताओं, जिला प्रशासन औरबंदोबस्तधारियों के कथित गठजोड़ से मानकों के विपरीत खनन कराया जा रहा है।
धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने दो टूक कहा कि वे अपनी खेती-किसानी और खेतों को बचाने के लिए हर स्तर तक संघर्ष करेंगे। किसानों ने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि मौरा बालू घाट को बंद नहीं किया गया तो सांसद और विधायक का प्रतीकात्मक दहन किया जाएगा तथा आंदोलन को और तीखा किया जाएगा।
भाकपा माले नेताओं ने ऐलान किया कि जिले भर में किसानों के हित में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। धरना में गौरव सिंह राठौड़, अशोक सिंह, कृष्ण रावत, अनिल रावत, रामानंद दुबे, विष्णु सिंह, केशव सिंह, सचिदानंद मंडल, रामशरूप मंडल सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे। आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि वे माफिया गठजोड़ के खिलाफ आखिरी दम तक लड़ने को तैयार हैं, जबकि प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और नियमसम्मत कार्रवाई की मांग की जा रही है।

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