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Friday, January 30, 2026

जमुई में फरोग-ए-उर्दू सेमिनार, कार्यशाला एवं मुशायरा का आयोजन, उर्दू की मिठास और गंगा-जमुनी तहजीब पर वक्ताओं ने डाला प्रकाश

जमुई में फरोग-ए-उर्दू सेमिनार, कार्यशाला एवं मुशायरा का आयोजन, उर्दू की मिठास और गंगा-जमुनी तहजीब पर वक्ताओं ने डाला प्रकाश

सिटी संवाददाता : प्रो० रामजीवन साहू 

जमुई : उर्दू निदेशालय, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार एवं जिला पदाधिकारी, जमुई के निदेशानुसार जिला मुख्यालय में फरोग-ए-उर्दू सेमिनार, कार्यशाला एवं मुशायरा का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के सभी उर्दू शिक्षक श्रोता के रूप में उपस्थित हुए, जबकि स्थानीय उर्दू प्रेमियों एवं नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।

कार्यक्रम का शुभारंभ पुलिस अधीक्षक जमुई, उप विकास आयुक्त, सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी, अधीक्षक मध्य निषेध, प्रभारी पदाधिकारी जिला उर्दू भाषा कोषांग नागमणि कुमार वर्मा, उप समाहर्ता भूमि सुधार, अनुमंडल पदाधिकारी तथा कला एवं सांस्कृतिक पदाधिकारी के संयुक्त कर-कमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

सेमिनार सत्र में पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने उर्दू भाषा के महत्व, उसके सामाजिक सरोकारों और शैक्षणिक भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। मोटिवेशनल स्पीकर एवं प्रशिक्षक फुरकान मुमताज खान ने शिक्षकों को उनके दायित्वों के प्रति जागरूक करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

पुलिस अधीक्षक जमुई ने अपने संबोधन में उर्दू भाषा की मिठास और गंगा-जमुनी तहजीब की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि उर्दू समाज को जोड़ने वाली भाषा है, जो विविधता में एकता का प्रतीक है।

जिला उर्दू भाषा कोषांग के प्रभारी पदाधिकारी नागमणि कुमार वर्मा ने कहा कि उर्दू इसी देश में जन्मी और पली-बढ़ी भाषा है। यह सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करती है तथा बिहार सरकार की अनेक योजनाओं के साथ द्वितीय राजभाषा के रूप में जुड़ी हुई है।

उप विकास आयुक्त ने कहा कि भाषा किसी एक वर्ग या समुदाय की नहीं होती। उर्दू ऐसी समृद्ध भाषा है, जिसमें अनेक भाषाओं का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में मुशायरा का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय शायरों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के कवियों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

फतह अमान ने पढ़ा—
“मोहब्बत को अभी समझा नहीं है,
जुदा होने का ग़म अच्छा नहीं है।
ग़ज़ल तो लिख दिया मैं उसकी खातिर,
मेरा उससे कोई रिश्ता नहीं है।”

नसीम साज़ ने अपने अशआर में कहा—
“खत्म ज़िंदगानी का मसअला नहीं होता,
इसलिए मोहब्बत का हौसला नहीं होता।”

मासूम रज़ा अमरथ्वी ने उर्दू की शान में कहा—
“ऐ मेरे ख्वाबों की मल्लिका, ऐ मेरी उर्दू ज़बान,
तुझ पर सदके मेरा दिल है, तुझ पर सदके मेरी जान।”

कार्यक्रम के अवसर पर जिला उर्दू कमिटी के सदस्य सैयद जुनैद अली, उर्दू अनुवादक मोहम्मद सादिक, जुल्फिकार अली भुट्टो, मोहम्मद अयूब अंसारी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

समापन के साथ यह संदेश दिया गया कि उर्दू भाषा के संवर्धन और प्रसार के लिए ऐसे आयोजन आगे भी जारी रहेंगे, ताकि भाषा और संस्कृति की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।

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