जमुई में विद्यालय रसोइया संघ का एक दिवसीय धरना, मानदेय बढ़ोतरी और 12 माह भुगतान की उठी मांग
जमुई : विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत कार्यरत रसोइयों की समस्याओं को लेकर बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ के बैनर तले सोमवार को जमुई मुख्यालय स्थित भीमराव अंबेडकर प्रतिमा स्थल के समक्ष एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस धरना में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आई दर्जनों महिला रसोइयों ने भाग लिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को मजबूती से रखा।
धरना पर बैठी रसोइयों ने सरकार से सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, मानदेय में बढ़ोतरी करने, पूरे 12 महीने का भुगतान सुनिश्चित करने और लंबित बकाया राशि के शीघ्र भुगतान की मांग की। रसोइयों का कहना था कि मध्याह्न भोजन योजना के तहत उनसे पूरे वर्ष कार्य लिया जाता है, लेकिन भुगतान केवल 10 महीने का ही किया जाता है, जो सरासर अन्याय है।
इस अवसर पर बिहार राज्य रसोइया संघ, जमुई के जिला सचिव मो. हैदर ने कहा कि वर्तमान में रसोइयों को मात्र 3300 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो न्यूनतम मजदूरी से भी कम है। उन्होंने कहा कि इतनी कम राशि में परिवार का भरण-पोषण करना असंभव है। रसोइया संघ की मांग है कि उन्हें कम से कम 10 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाए तथा 9700 रुपये न्यूनतम मजदूरी को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
मो. हैदर ने यह भी आरोप लगाया कि कई विद्यालयों में रसोइयों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रसोइयों की लड़ाई सरकार से है, न कि किसी विद्यालय के प्रधानाध्यापक से, लेकिन स्कूल स्तर पर होने वाली प्रताड़ना पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने बताया कि रसोइयों का दो माह का मानदेय अब तक बकाया है, जिसके कारण जनवरी माह में कई परिवारों को बिना पैसे के त्योहार मनाने पड़े।
धरना-प्रदर्शन के दौरान रसोइया संघ ने कुछ गंभीर मामलों की ओर भी प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया। संघ के अनुसार, बरहट प्रखंड के उत्क्रमित विद्यालय लकरा के रसोइया हरे राम मंडल की मृत्यु के बाद भी उनके परिजनों को अब तक सरकार की ओर से मिलने वाला चार लाख रुपये का अनुदान नहीं दिया गया है। इसी तरह चकाई प्रखंड में एक अन्य रसोइया की मृत्यु को चार वर्ष बीत जाने के बावजूद परिजनों को सहायता राशि नहीं मिल सकी है।
रसोइयों ने प्रशासन से इन मामलों में शीघ्र कार्रवाई कर मृतक रसोइयों के परिजनों को अनुदान राशि देने, लंबित मानदेय का भुगतान करने और उनकी मांगों को राज्य सरकार तक पहुंचाने की मांग की। धरना शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ, हालांकि रसोइयों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगी।
धरना स्थल पर मौजूद रसोइयों ने कहा कि वे वर्षों से बच्चों को भोजन बनाकर शिक्षा व्यवस्था में योगदान दे रही हैं, लेकिन बदले में उन्हें न तो सम्मान मिल रहा है और न ही उचित पारिश्रमिक। ऐसे में सरकार को उनकी स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

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