जमुई:: बिहार विधानसभा चुनाव के बीच सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र के चारण गांव में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के उम्मीदवार प्रफुल्ल मांझी को जनता के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। प्रचार के दौरान ग्रामीणों ने उनके काफिले के सामने काला झंडा दिखाकर विरोध जताया और ‘प्रफुल्ल मांझी मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। यह विरोध अचानक नहीं था, बल्कि बीते पांच वर्षों की नाराजगी का परिणाम माना जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने प्रफुल्ल मांझी को भारी समर्थन देकर विजयी बनाया था, लेकिन उनके कार्यकाल में क्षेत्र में कोई ठोस विकास कार्य नहीं हुए। सड़क, बिजली, पानी और रोजगार जैसी बुनियादी समस्याएँ जस की तस बनी रहीं। लोगों का आरोप है कि विधायक बनने के बाद मांझी ने गांव की सुध नहीं ली और अब चुनाव आते ही फिर वोट मांगने पहुंचे हैं।
विरोध के दौरान माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया। एक युवक काफिले के आगे काला झंडा लहराता नजर आया, जबकि कई लोग ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाते हुए नेताओं के खिलाफ नाराजगी जताते रहे। मौके पर मौजूद समर्थकों ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने पीछे हटने से इनकार कर दिया।
स्थानीय लोगों द्वारा बनाया गया यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। क्षेत्र के राजनीतिक हलकों में यह घटना चर्चा का विषय बन गई है। जानकारों का कहना है कि इस तरह के विरोध सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवारों के लिए चुनौती साबित हो सकते हैं। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिकंदरा में जनता की नाराजगी विपक्षी दलों के लिए बड़ा अवसर बन सकती है।
एनडीए खेमे के लिए यह घटना एक चेतावनी मानी जा रही है कि जनता अब वादों के बजाय विकास के आधार पर अपने जनप्रतिनिधियों का मूल्यांकन कर रही है। सिकंदरा की यह घटना आने वाले चरणों में क्षेत्रीय राजनीति के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
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