सिटी ब्यूरो रिपोर्ट : राजीव रंजन
जमुई/बिहार : राष्ट्र गुणगान यात्रा को लेकर उठे विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। नेचर विलेज के संस्थापक एवं राष्ट्र गुणगान यात्रा के सूत्रधार निर्भय प्रताप सिंह ने रविवार को नेचर विलेज कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशासनिक रवैये और राजनीतिक हस्तक्षेप पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यात्रा का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या स्वार्थ से जुड़ा नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को स्मरण कराना तथा युवाओं में राष्ट्रवादी चेतना जागृत करना है। इसके बावजूद यात्रा में बार-बार अवरोध डाला जा रहा है, जो लोकतंत्र की गरिमा के लिए चिंताजनक है।
निर्भय प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारी दोहरे मापदंड अपना रहे हैं। उन्होंने कहा, “जब चौक पर हमने यात्रा का कार्यक्रम किया, तो अधिकारियों ने कहा कि आवेदन लेने का अधिकार उनके पास नहीं है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से जब यात्रा को रोकने की बात आती है तो वे तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। यह दोहरा रवैया लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है।”
उन्होंने बताया कि हाल ही में बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा से मिलकर उन्होंने इस मामले की शिकायत की थी। उपमुख्यमंत्री ने स्वयं एसडीएम को निर्देश दिया था कि राष्ट्र गुणगान यात्रा में किसी प्रकार की बाधा न डाली जाए। इसके बावजूद अधिकारियों का रवैया नहीं बदला। “यह साबित करता है कि दबाव कहीं और से आ रहा है। प्रशासन का ऐसा आचरण घृणित और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है,” सिंह ने कहा।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान निर्भय प्रताप सिंह ने उन जनप्रतिनिधियों पर भी निशाना साधा जो, उनके अनुसार, जनता से वर्षों तक कटे रहे और अब यात्रा का विरोध कर रहे हैं। “चार साल तक क्षेत्र के लोगों ने उन्हें नहीं देखा। न गरीबों की हालत पूछी, न महिलाओं-बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य की चिंता की। न टूटी सड़कों और बिगड़े हालात पर ध्यान दिया। लेकिन जब राष्ट्र गुणगान यात्रा को जनसमर्थन मिलने लगा तो यह कुछ नेताओं को खटकने लगी,” उन्होंने कहा।
सिंह ने स्पष्ट किया कि यात्रा किसी प्रकार का राजनीतिक अभियान नहीं है। “हमने कभी वोट नहीं मांगा। यात्रा का मकसद केवल स्वतंत्रता सेनानियों की गाथा सुनाना और युवाओं को उनके योगदान से अवगत कराना है। आज का युवा मोबाइल और इंटरनेट में उलझा हुआ है, लेकिन उसे अपने नायकों का इतिहास नहीं पता। यह यात्रा उसी खालीपन को भरने का प्रयास है,” उन्होंने जोड़ा।
उन्होंने तिरंगा यात्रा में बाधा डालने के प्रयासों पर भी गंभीर सवाल उठाए। “जो अधिकारी कल चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर बनने वाले हैं, यदि वे आज ही राजनीतिक दबाव में काम करेंगे तो निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद कैसे की जा सकती है? यह जांच का विषय है कि किनके इशारे पर तिरंगा को रोका गया और यात्रा को बाधित किया गया,” सिंह ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय स्तर पर न्याय की उम्मीद खत्म हो चली इसलिए केंद्र को भेजेगे सबूत ।
वहीं वंशवाद और विरासत आधारित राजनीति पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं को वही समझ सकता है जो संघर्ष करता है और उनके बीच रहता है। “सियासत कुर्सी से नहीं, संघर्ष से पैदा होती है। किसानों, मजदूरों, महिलाओं और युवाओं की समस्याओं को महसूस किए बिना कोई भी नेता जनता का विश्वास हासिल नहीं कर सकता,” उन्होंने टिप्पणी की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में निर्भय प्रताप सिंह ने दोहराया कि राष्ट्र गुणगान यात्रा राष्ट्र के गौरव को पुनः स्थापित करने का प्रयास है। इसे रोकने की कोशिश दरअसल राष्ट्रवादी विचारों को दबाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि चाहे कितनी भी बाधाएँ आएँ, यात्रा जारी रहेगी और लोगों को उनके गौरवशाली इतिहास से अवगत कराती रहेगी।

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