जमुई में नेचर विलेज की राष्ट्रगुणगान तिरंगा यात्रा, गांव-गांव उमड़ा जनसैलाब
सिटी ब्यूरो रिपोर्ट : राजीव रंजन
जमुई/बिहार : नेचर विलेज के संस्थापक निर्भय प्रताप सिंह के नेतृत्व में चल रही राष्ट्रगुणगान तिरंगा यात्रा अपने नौवें दिन को जमुई प्रखंड के काकन पंचायत के विभिन्न गांवों में प्रवेश किया। तिरंगे के सम्मान और राष्ट्रगौरव की अलख जगाने वाली इस यात्रा में ग्रामीणों का अपार उत्साह देखने को मिला।
गांव-गांव उमड़ा जनसैलाब :
यात्रा के स्वागत के लिए नविनगर, मंझवे, कुंडली, संकुरा, खंडसारी सहित कई गांवों में लोगों ने भारी संख्या में भागीदारी की। यात्रा में शामिल लोगों ने जगह-जगह राष्ट्रीय ध्वज के साथ नारे लगाए और देशभक्ति गीत गाए।
ग्रामीणों ने फूल बरसाकर और तिरंगे लहराकर यात्रा का स्वागत किया।
स्वदेशी का आह्वान, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार :
जिला परिषद सदस्य पद के पूर्व प्रत्याशी तनुज कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित स्वागत समारोह में निर्भय प्रताप सिंह ने लोगों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने और विदेशी सामान का बहिष्कार करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि –“देश की सेवा केवल भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आमजन की भागीदारी जरूरी है। यदि हम स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करेंगे तो न केवल देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी सृजित होंगे।”
युवा और महिलाएं बनीं तिरंगा यात्रा की शक्ति :
यात्रा में युवाओं और महिलाओं की विशेष भागीदारी देखने को मिली।
महिलाएं तिरंगे के साथ गीत-संगीत में शामिल हुईं, वहीं युवा जोश और ऊर्जा के साथ “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “स्वदेशी अपनाओ, देश को आगे बढ़ाओ” जैसे नारे लगाते रहे।
बच्चे भी तिरंगा हाथों में थामे यात्रा में शामिल हुए, जिससे वातावरण पूरी तरह राष्ट्रभक्ति में डूब गया।
लगातार बढ़ रहा है कारवां :
नवम दिवस की यह यात्रा काकन, बहराइन, नीमनवादा, भाटचक, सोनाय और मडबा समेत दर्जनों गांवों तक पहुंची। प्रत्येक गांव में लोगों ने इसे जनजागरण और राष्ट्रगौरव का प्रतीक मानते हुए उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
निर्भय प्रताप सिंह ने यह भी कहा कि –
“राष्ट्रगुणगान तिरंगा यात्रा का उद्देश्य केवल एक जुलूस निकालना नहीं है, बल्कि यह लोगों को आत्मनिर्भरता, स्वदेशी और देशभक्ति की राह पर प्रेरित करने का अभियान है। यह यात्रा गांव-गांव में जाकर लोगों में एकजुटता और राष्ट्रप्रेम का संदेश फैला रही है।”
स्थानीय समर्थन से बना जनआंदोलन का स्वरूप :
स्थानीय ग्रामीण नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस यात्रा को समर्थन दिया और इसे युवा शक्ति और सामाजिक एकता का प्रतीक बताया।
हर गांव में यात्रा का माहौल मेले जैसा रहा, जहां लोग न केवल शामिल हुए बल्कि अपने घरों से तिरंगा निकालकर यात्रा को सलामी दी।



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