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Monday, August 4, 2025

सावन की अंतिम सोमवारी पर पतनेश्वर धाम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

सावन की अंतिम सोमवारी पर पतनेश्वर धाम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

🔹30 हज़ार से अधिक श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक, प्रशासन रहा सतर्क।

जमुई/बिहार : बरहट प्रखंड स्थित ऐतिहासिक पतनेश्वर धाम मंदिर में सावन की अंतिम सोमवारी को श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के सुबह तीन बजे से ही मंदिर प्रांगण में भक्तों की भीड़ जुटने लगी थी। 'हर हर महादेव' और 'बोल बम' के गगनभेदी जयघोष से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया।

पूजा समिति के अनुसार, इस बार करीब 30,000 श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया, जो कि पिछली सोमवारी से 10,000 अधिक है। भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। महिला श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए महिला पुलिस बल की तैनाती भी की गई थी।

मलयपुर थानाध्यक्ष स्वयं मौके पर उपस्थित रहकर व्यवस्था की निगरानी कर रहे थे। पूजा समिति द्वारा मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, जिनकी लाइव मॉनिटरिंग समिति के नियंत्रण कक्ष से की जा रही थी।

यह उल्लेखनीय है कि दूसरी सोमवारी को दो महिला श्रद्धालुओं के गहने चोरी हो गए थे, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई में एक आरोपी की गिरफ्तारी कर मामले का उद्भेदन कर लिया गया था। इस बार गर्भगृह तक महिला पुलिस की मौजूदगी रही ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्त्व का केंद्र:

पतनेश्वर धाम सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम है। इस मंदिर का निर्माण 1711 ईस्वी में हुआ था और यह किऊल नदी के तट पर स्थित पतनेश्वर पर्वत की चोटी पर विराजमान है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 104 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

मान्यता है कि यहां स्थित शिवलिंग स्वयंभू है और यहां पूजा करने से असाध्य रोग भी ठीक हो जाते हैं। मंदिर परिसर में माता पार्वती सहित अन्य देवी-देवताओं के भी मंदिर बने हुए हैं, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं।

स्थानीय जनमान्यता के अनुसार, किऊल नदी में स्नान कर सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, ओडिशा से आए एक कुष्ठ रोगी को भगवान ने स्वप्न में दर्शन दिए थे और पतनेश्वर धाम आने का संकेत दिया था। उस भक्त ने एक माह तक यहां सेवा की और पूरी तरह रोगमुक्त हो गया।

अन्य शिवालयों में भी उमड़ी भीड़:

सावन की अंतिम सोमवारी को जिले के अन्य शिवालयों में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन पूरे दिन चलता रहा। प्रशासन की सक्रियता और पूजा समिति की सतर्कता से पूरे आयोजन का शांतिपूर्ण और व्यवस्थित संचालन संभव हो सका।

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