गृह रक्षकों का सरकार के खिलाफ मोर्चा, 21 सूत्री मांगों को लेकर जमुई सहित सभी जिलों में धरना-प्रदर्शन
जमुई/बिहार : बिहार में गृह रक्षकों की लंबित मांगों को लेकर आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर फूट पड़ा। मंगलवार को जमुई सहित सभी जिला मुख्यालयों में गृह रक्षकों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। जमुई में यह आंदोलन श्रीकृष्ण सिंह मेमोरियल स्टेडियम से निकली रैली के रूप में शुरू हुआ, जो कचहरी चौक, महाराजगंज, महिसौड़ी चौक और अतिथि पैलेस होते हुए समाहरणालय पहुंची। रैली में बड़ी संख्या में गृह रक्षकों ने भाग लिया और सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
सरकार पर भेदभाव का आरोप :
जिला अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने बताया कि पिछले 8 वर्षों से 21 सूत्री मांगें लंबित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार आश्वासन तो देती है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मनोज सिंह ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार गृह रक्षकों के साथ लगातार भेदभाव कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आगामी चुनाव में सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। सिंह ने कहा कि इस आंदोलन को नजरअंदाज करना सरकार के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है, क्योंकि पूरे राज्य में गृह रक्षकों और उनके परिवारों की संख्या मिलाकर करीब 7 लाख वोट प्रभावित होंगे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं :
धरने में शामिल जिला सचिव सुरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने समान काम के लिए समान वेतन देने का आदेश दिया था। बावजूद इसके अब तक गृह रक्षकों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की तो गृह रक्षक आगामी चुनाव में मतदान कार्य का बहिष्कार करेंगे।
धरने में शामिल हुई बड़ी संख्या-:
धरना-प्रदर्शन में दर्जनों गृह रक्षक वाहिनी के जवान शामिल हुए। इस दौरान सरकार से नियमित बहाली, सेवा सुरक्षा, समान वेतन, बीमा कवरेज और सेवानिवृत्ति लाभ जैसी प्रमुख मांगों पर जोर दिया गया।
आंदोलन का संभावित असर :
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गृह रक्षकों की नाराजगी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। राज्य में जहां एक ओर सुरक्षा व्यवस्था को गृह रक्षक मजबूती देते हैं, वहीं दूसरी ओर चुनावी कार्यों में भी इनकी अहम भूमिका रहती है। ऐसे में आंदोलन का रुख कड़ा हुआ तो सरकार और प्रशासन दोनों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है।

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