🔸वृद्धजनों को साड़ी और गमछा देकर किया सम्मानित, छात्राओं को मिला पेंसिल बॉक्स; सामूहिक गायन से हुआ कार्यक्रम का समापन।
सिटी संवाददाता : प्रो० रामजीवन साहू की रिपोर्ट।
जमुई: अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर बुधवार को शहर के रावणेश्वर हॉल में नई और पुरानी पीढ़ी के बीच आत्मीय संवाद और सम्मान का भाव देखने को मिला। जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग, जमुई के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में जिला शिक्षा विभाग तथा जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की सहभागिता रही।
कार्यक्रम का उद्देश्य वृद्धजनों के अधिकार, सम्मान, गरिमा और कल्याण के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के साथ बच्चों और बुजुर्गों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करना रहा।
डीएम ने कहा- बुजुर्ग अनुभवों की अमूल्य धरोहर
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद जिला पदाधिकारी ने वरिष्ठ नागरिकों और वृद्धजनों का स्वागत करते हुए कहा कि बुजुर्ग परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके पास जीवन के लंबे अनुभव, संस्कार और सामाजिक मूल्यों का भंडार है।
उन्होंने बच्चों और युवाओं से अपनी व्यस्त दिनचर्या में से समय निकालकर दादा-दादी और नाना-नानी के साथ बातचीत करने तथा उनके अनुभवों से सीखने की अपील की। उन्होंने कहा कि वृद्धजनों का सम्मान किसी एक दिवस तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक व्यवहार और पारिवारिक संस्कार का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
बच्चों की प्रस्तुतियों ने जीता दिल
जिला शिक्षा पदाधिकारी के मार्गदर्शन और शिक्षकों की देखरेख में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। बच्चों ने कविता, कहानी, गीत और अन्य प्रस्तुतियों के माध्यम से बुजुर्गों के प्रति सम्मान, स्नेह और कृतज्ञता की भावना व्यक्त की।
बच्चों की प्रस्तुतियों से सभागार में मौजूद वरिष्ठ नागरिकों के चेहरे पर खुशी और भावुकता साफ नजर आई। कार्यक्रम का माहौल संवेदना और अपनत्व से भर गया।
साड़ी और गमछा देकर वृद्धजनों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान दादा-दादी और नाना-नानी को साड़ी एवं गमछा भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं कार्यक्रम में शामिल छात्राओं का उत्साह बढ़ाने के लिए उन्हें पेंसिल बॉक्स प्रदान किए गए।
जिला पदाधिकारी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले पदाधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अन्य सहयोगियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं।
एक साथ गूंजे कई पीढ़ियों के स्वर
कार्यक्रम का सबसे आत्मीय क्षण अंत में देखने को मिला, जब वृद्धजन, पदाधिकारी, शिक्षक और बच्चे एक साथ सामूहिक गायन में शामिल हुए। अलग-अलग पीढ़ियों की एक साथ गूंजती आवाजों ने पूरे रावणेश्वर हॉल को उत्साह और अपनत्व से भर दिया।
यह सामूहिक गायन केवल कार्यक्रम का समापन नहीं रहा, बल्कि बुजुर्गों के अनुभव और नई पीढ़ी की ऊर्जा के बीच जुड़ाव, सम्मान और प्रेम का संदेश भी बना।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बुजुर्ग समाज की जीवंत धरोहर हैं। उनके अनुभवों का सम्मान और उनके साथ आत्मीय संबंध आने वाली पीढ़ियों को संस्कार और जीवन-मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

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