🔻नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर वैधानिक व्यवस्था पर विचार का निर्देश, संगठन ने यौन शोषण और साइबर ठगी जैसे खतरों से बचाव को बताया जरूरी।
जमुई, 30 सितंबर 2026। नाबालिगों की सोशल मीडिया तक पहुंच और डिजिटल सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख का जमुई में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए काम कर रहे तटवासी समाज न्यास ने स्वागत किया है। संगठन ने कहा कि बच्चों को ऑनलाइन दुनिया में मौजूद विभिन्न खतरों से बचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म को भारतीय कानूनों के अनुरूप संचालित करना और प्रभावी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को केंद्र सरकार से इस बात पर विचार करने को कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल इंटरमीडियरी के लिए वैधानिक नियम बनाए जा सकते हैं या नहीं, ताकि नाबालिगों से जुड़े भारतीय कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित हो। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे।
मामला Just Rights for Children Alliance की याचिका से जुड़ा है। याचिका में नाबालिगों द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म की शर्तें स्वीकार कर स्वतंत्र रूप से सोशल मीडिया अकाउंट बनाने से जुड़े कानूनी और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर आवश्यक संरक्षण की मांग की गई थी।
ऑनलाइन शोषण के खतरे पर चिंता
तटवासी समाज न्यास के निदेशक कन्हैया कुमार सिंह ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारतीय कानूनों के अनुरूप काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन माध्यमों के जरिए नाबालिगों को यौन शोषण, ट्रैफिकिंग और सेक्सटॉर्शन जैसी गतिविधियों का शिकार बनाए जाने का खतरा रहता है।
उन्होंने साइबर बुलिंग और बच्चों के निजी डेटा के दुरुपयोग को भी गंभीर जोखिम बताया। उनके अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट और प्रभावी व्यवस्था होने से ऐसे जोखिमों से बचाव में मदद मिल सकती है।
इंटरमीडियरी नियमों में प्रावधान पर विचार
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों से संबंधित सुरक्षा व्यवस्था केवल दिशानिर्देश तक सीमित न रहे। उन्होंने केंद्र से इंटरमीडियरी नियमों के मौजूदा ढांचे में आवश्यक प्रावधान शामिल करने की संभावना पर विचार करने को कहा। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस विषय की जांच कर आवश्यक कदम उठाने की बात कही।
सुप्रीम कोर्ट की 29 सितंबर की आधिकारिक कॉज लिस्ट में भी इस मामले की सुनवाई वाली पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना के नाम दर्ज हैं।
तटवासी समाज न्यास ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी जागरूकता के साथ-साथ डिजिटल सुरक्षा को लेकर अभिभावकों, बच्चों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म—सभी स्तरों पर जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। संगठन के अनुसार, वह Just Rights for Children Alliance के सहयोगी संगठन के रूप में बाल अधिकार संरक्षण से जुड़े अभियानों में कार्य कर रहा है।

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