लेह-लद्दाख में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए जमुई के जवान मनीर अंसारी, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

जमुई। लेह-लद्दाख में देश की सेवा में तैनात जमुई के सिकंदरा प्रखंड निवासी जवान मनीर अंसारी (43) की ड्यूटी के दौरान सड़क हादसे में मौत हो गई। करीब 26 वर्षों तक देश की सेवा करने वाले मनीर अंसारी का पार्थिव शरीर शनिवार देर रात उनके पैतृक गांव खरडीह पहुंचा। जवान के निधन की खबर से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
मनीर अंसारी रक्षा मंत्रालय के अधीन जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स (GREF) में स्टोर कीपर के पद पर लेह-लद्दाख में तैनात थे। वर्ष 2000 में उन्होंने सेवा शुरू की थी। वर्ष 2005 में उनकी शादी फरहीन सदफ से हुई थी। उनके परिवार में बेटी आलिया परवीन (19) और बेटा मोहम्मद अरसलान अंसारी (15) हैं।
परिजनों के अनुसार 3 सितंबर की शाम सेना के एक सूबेदार ने मनीर की पत्नी फरहीन सदफ को फोन कर ड्यूटी के दौरान हादसे की जानकारी दी थी। बताया गया था कि मनीर घायल हैं और आर्मी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।
बताया गया कि ड्यूटी के दौरान रोड कटर मशीन को फट्टे की मदद से गाड़ी से उतारा जा रहा था। इसी दौरान फट्टा खिसक गया और मशीन अनियंत्रित होकर पलट गई। मशीन मनीर के पैर पर गिरने से उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्हें तत्काल आर्मी अस्पताल ले जाया गया, जहां ऑपरेशन किया गया।
परिजनों को उम्मीद थी कि इलाज के बाद वह स्वस्थ होकर घर लौटेंगे, लेकिन 4 सितंबर की सुबह सेना की ओर से उनकी मौत की सूचना दी गई। परिजनों के मुताबिक इलाज के दौरान अधिक रक्तस्राव होने से उनकी मौत हुई। पति की मौत की खबर सुनकर पत्नी फरहीन सदफ बेसुध हो गईं। बेटी और बेटे का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
रविवार सुबह नमाज के बाद मनीर अंसारी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सिकंदरा पुलिस के जवानों ने सलामी दी। बीडीओ अतुल प्रसाद, पुलिस निरीक्षक स्वयं प्रभा और थानाध्यक्ष विकास कुमार समेत पुलिस पदाधिकारियों एवं जवानों ने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद कर्बला में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
अंतिम विदाई के दौरान सैकड़ों ग्रामीण और आसपास के गांवों के लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। जनप्रतिनिधियों, स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों ने श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी।
मनीर अंसारी की पत्नी फरहीन सदफ ने बताया कि 3 सितंबर की सुबह करीब 7:30 बजे उनकी पति से आखिरी बार बात हुई थी। वह ऑफिस जाने की तैयारी कर रहे थे। शाम को हादसे की सूचना मिली तो उनकी हालत सामान्य बताई गई थी। अगले दिन उनकी मौत की जानकारी मिली।
फरहीन सदफ ने कहा कि यदि उनका बेटा भी देश की सेवा करना चाहेगा तो वह उसे सेना में भेजने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगी। मनीर अंसारी ने करीब 26 वर्षों तक देश की सेवा की और दुर्गम लेह-लद्दाख क्षेत्र में ड्यूटी निभाते हुए उनका निधन हुआ।
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