जश्न-ए-आजादी में सेवा का रंग, स्वतंत्रता दिवस पर लक्ष्मीपुर में डॉ. नीरज साह ने दी गरीब बच्चों के हाथों में स्कूल किट
▪️डॉ. नीरज साह ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा— “आधी रोटी खाइए, लेकिन बच्चों को जरूर पढ़ाइए।”
सिटी ब्यूरो रिपोर्ट : राजीव रंजन/राकेश कुमार/ब्रह्मदेव प्रसाद यादव।
लक्ष्मीपुर/जमुई : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जमुई जिले के प्रसिद्ध समाजसेवी, हड्डी रोग विशेषज्ञ एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के अध्यक्ष डॉ. नीरज साह ने आजादी के जश्न को सेवा और शिक्षा के संकल्प से जोड़ते हुए अनोखे अंदाज में मनाया। लक्ष्मीपुर प्रखंड क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने सैकड़ों गरीब एवं जरूरतमंद स्कूली बच्चों के बीच स्कूल बैग, पुस्तक सहित अन्य शैक्षणिक सामग्री का वितरण किया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के अध्यक्ष सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर बच्चों के साथ उनके माता-पिता को भी शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।
डॉ. नीरज साह ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा से जोड़ना ही सबसे बड़ा सामाजिक कार्य है। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि “आधी रोटी खाइए, लेकिन अपने बच्चों को जरूर पढ़ाइए।”
उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जिससे गरीब और वंचित परिवारों के बच्चे भी अपने जीवन में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पिएगा वह दहाड़ेगा।”
20 वर्षों से शिक्षा और समाजसेवा में सक्रिय
डॉ. नीरज साह ने बताया कि वे पिछले करीब 20 वर्षों से जमुई जिले में शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य खासकर शोषित, वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना है।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन कई बार जरूरतमंद बच्चों तक उनका पूरा लाभ नहीं पहुंच पाता है। ऐसे में समाज के सक्षम लोगों को भी आगे आकर अपनी भूमिका निभानी होगी।
अभिभावकों से की बच्चों को स्कूल भेजने की अपील
डॉ. नीरज साह ने कहा कि बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें और उनकी पढ़ाई में सहयोग करें।
उन्होंने कहा, “सरकार, शिक्षक, अभिभावक और समाज सभी मिलकर प्रयास करेंगे, तभी शिक्षा का स्तर बेहतर होगा।”
“पहले खुद सुधरेंगे, तभी समाज सुधरेगा”
समाज सुधार के सवाल पर उन्होंने कहा कि बदलाव की शुरुआत खुद से करनी होगी। उन्होंने कहा कि केवल सरकार के भरोसे समाज का विकास संभव नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभानी होगी।
उन्होंने कहा, “पहले खुद को सुधारना होगा, तभी समाज सुधरेगा और देश आगे बढ़ेगा।”
मानव सेवा को बताया जीवन का उद्देश्य
डॉ. नीरज साह ने कहा कि भगवान ने उन्हें डॉक्टर के रूप में लोगों की सेवा करने का अवसर दिया है और उनका प्रयास है कि जीवन में जरूरतमंद लोगों के लिए कुछ सार्थक कार्य कर सकें।
उन्होंने कहा, “जो व्यक्ति सिर्फ अपने लिए जीता है, उसका जीवन सीमित रह जाता है। जो समाज और गरीबों के लिए जीता है, वही जीवन को सार्थक बनाता है।”
स्थानीय लोगों ने की पहल की सराहना
राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के अध्यक्ष और स्थानीय लोगों ने डॉ. नीरज साह के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि वे चिकित्सक के साथ-साथ समाजसेवी के रूप में लगातार गरीब और जरूरतमंद लोगों के बीच पहुंचकर सेवा कार्य कर रहे हैं।
लक्ष्मीपुर जैसे ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों को शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराकर उन्होंने शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का सराहनीय प्रयास किया है।
🇮🇳 स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि देश की आजादी का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब समाज का प्रत्येक बच्चा शिक्षित होकर अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझ सके।

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