*8वें रज महोत्सव में ओडिशा की संस्कृति का भव्य उत्सव*
*सर्वेशम मंगलम फाउंडेशन के थैलेसीमिया एवं रक्तदान जागरूकता अभियान ने बटोरी सराहना*
सिटी स्टेट ब्यूरो उत्तरप्रदेश : राजीव शर्मा/मनोज कुमार
गुरुग्राम : हरियाणा के गुरुग्राम में आयोजित 8वें रज महोत्सव ने इस वर्ष केवल सांस्कृतिक उत्सव के रूप में ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और जनसेवा के एक सशक्त मंच के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की।
ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं, कला, संगीत और सामाजिक सरोकारों का अद्भुत संगम इस महोत्सव में देखने को मिला। कलिंग भारती फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश तथा आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में प्रवासी ओड़िया समुदाय के लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुग्राम के माननीय विधायक मुकेश शर्मा तथा वरिष्ठ जननेता बैजयंत पांडा द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। अपने संबोधन में दोनों अतिथियों ने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे ओड़िया समुदाय द्वारा अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय एकीकरण को भी मजबूत करने का कार्य करते हैं। महोत्सव के दौरान ओडिशा की पारंपरिक लोक संस्कृति की मनमोहक झलक देखने को मिली। लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और रंगारंग कार्यक्रमों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत, ग्रामीण जीवन, लोककथाओं और परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
वहीं विभिन्न स्टॉलों पर उपलब्ध पारंपरिक ओड़िया व्यंजन और पकवान भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। हालांकि इस भव्य सांस्कृतिक आयोजन के बीच जिस पहल ने सबसे अधिक लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया, वह थी सर्वेशम मंगलम फाउंडेशन द्वारा संचालित थैलेसीमिया रोकथाम एवं स्वैच्छिक रक्तदान जागरूकता अभियान। फाउंडेशन द्वारा लगाए गए विशेष जागरूकता स्टॉल पर दिनभर लोगों की भारी भीड़ लगी रही।
आंकड़ों के अनुसार 200 से अधिक लोगों ने स्टॉल का भ्रमण कर थैलेसीमिया, रक्तदान और आनुवंशिक रोगों की रोकथाम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। फाउंडेशन की टीम ने लोगों को विस्तार से बताया कि थैलेसीमिया एक गंभीर आनुवंशिक रक्त विकार है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित हो सकता है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों और वयस्कों को जीवनभर नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है।
विशेषज्ञों ने आगंतुकों को जानकारी दी कि विवाह से पूर्व एक साधारण कैरियर स्क्रीनिंग रक्त जांच कराकर इस बीमारी के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है। साथ ही लोगों को आनुवंशिक परामर्श, समय पर चिकित्सा जांच और नियमित स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व के बारे में भी जागरूक किया गया। इस जागरूकता अभियान का नेतृत्व कर रहीं थैलेसीमिया योद्धा एवं सर्वेशम मंगलम फाउंडेशन की निदेशक झरना मलिक पूरे कार्यक्रम के दौरान लोगों को बीमारी की रोकथाम और रक्तदान के महत्व के प्रति जागरूक करती नजर आईं।
स्वयं थैलेसीमिया से संघर्ष करते हुए समाज में जागरूकता की अलख जगाने वाली झरना मलिक का समर्पण और सेवा भावना उपस्थित लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बनी रही। झरना मलिक ने कहा कि समाज में आज भी थैलेसीमिया के प्रति पर्याप्त जागरूकता का अभाव है, जबकि यह एक ऐसी बीमारी है जिसकी रोकथाम संभव है। उन्होंने कहा, "हमें लोगों से बेहद सकारात्मक और उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है।
बड़ी संख्या में लोगों ने थैलेसीमिया की रोकथाम, कैरियर स्क्रीनिंग और रक्तदान के महत्व को समझने में रुचि दिखाई। यह देखकर खुशी होती है कि अब लोग रक्तदान से जुड़े मिथकों और भ्रांतियों को पीछे छोड़कर समाजहित में आगे आने लगे हैं। जागरूकता ही रोकथाम की पहली सीढ़ी है और हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाई जाए ताकि आने वाली पीढ़ियों को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सके।"
उन्होंने आगे कहा कि थैलेसीमिया से पीड़ित हजारों मरीज नियमित रक्तदान करने वाले दानदाताओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदान केवल एक सामाजिक दायित्व ही नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम भी है। उन्होंने युवाओं से नियमित रक्तदान करने और अपने परिवारों में थैलेसीमिया जांच को प्रोत्साहित करने की अपील की।
कार्यक्रम में उपस्थित अनेक लोगों ने सर्वेशम मंगलम फाउंडेशन की इस पहल की खुलकर सराहना की। लोगों का कहना था कि सांस्कृतिक आयोजनों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों को शामिल करने से समाज के बड़े वर्ग तक महत्वपूर्ण जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचती है। कई आगंतुकों ने भविष्य में आयोजित होने वाले रक्तदान शिविरों और जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी का भी संकल्प व्यक्त किया।
रज महोत्सव में सर्वेशम मंगलम फाउंडेशन की भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया कि सांस्कृतिक आयोजन केवल परंपराओं और विरासत को संरक्षित करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक जागरूकता, स्वास्थ्य शिक्षा, जनकल्याण और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने के लिए भी एक सशक्त मंच का कार्य कर सकते हैं। संस्कृति और समाजसेवा के इस सुंदर समन्वय ने महोत्सव को नई पहचान प्रदान की तथा उपस्थित लोगों के मन पर गहरी छाप छोड़ी।

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