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Tuesday, February 10, 2026

रामकथा में भरत चरित्र और रामराज्य की लीला ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर

रामकथा में भरत चरित्र और रामराज्य की लीला ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर


- श्रीराम के राज्याभिषेक पर दीपोत्सव आयोजित

- रामकथा में श्रवण कुमार के प्रसंग से बताई माता-पिता की महत्ता

गिद्धौर : गिद्धौर स्थित ऐतिहासिक पंचमंदिर परिसर के समीप सनातन संस्कृति सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय विराट महायज्ञ अपने चरम पर पहुंच चुका है। 

महायज्ञ के आठवें दिन सोमवार की देर शाम रामकथा और रामलीला के भावपूर्ण प्रसंगों ने पूरे वातावरण को भक्ति और करुणा से सराबोर कर दिया। श्रीधाम वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथा प्रवक्ता पंडित कृष्णकांत जी महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीरामकथा के मार्मिक प्रसंगों का रसपान कराया। कथा के दौरान पंडित कृष्णकांत जी महाराज ने सर्वप्रथम श्रवण कुमार के प्रसंग का वर्णन करते हुए माता-पिता की सेवा और आज्ञापालन के महत्व को विस्तार से बताया।

 इसके उपरांत उन्होंने भरत चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा में बताया गया कि जब दूत भरत जी के ननिहाल पहुंचे और उन्हें अयोध्या बुलाने का संदेश दिया, तो अयोध्या लौटने पर भरत जी ने नगरी में सूनापन और लोगों के मुख फेरने का दृश्य देखा। वे जब माता कैकेई के पास राम जी से मिलने पहुंचे, तो वहां उन्हें पिता महाराज दशरथ के देहावसान और श्रीराम को चौदह वर्षों के वनवास का समाचार मिला। इस समाचार को सुनकर भरत जी पिता के निधन के दुख को भी भूल गए और माता कैकेई को कठोर शब्द कहते हुए उनके निर्णय की भर्त्सना की। उन्होंने स्वयं को कैकेई का पुत्र मानने से इंकार कर दिया और माता कौशल्या के चरणों में जाकर क्षमा याचना की। इसी प्रसंग में श्रृंगार कर आई मंथरा को शत्रुघ्न जी द्वारा दंडित किए जाने का दृश्य भी कथा में वर्णित किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे। रामकथा के दौरान पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। 


इधर, महायज्ञ के अंतर्गत आयोजित रामलीला का भव्य समापन सोमवार की अर्धरात्रि में हुआ। रामलीला में रावण वध, लंका विजय और अयोध्या वापसी के उपरांत भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का अत्यंत मनोहारी मंचन किया गया। इस अवसर पर पंडाल में दीप जलाकर दीपावली जैसा उत्सव मनाया गया, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। संपूर्ण रामलीला के दौरान पंडाल दर्शकों से खचाखच भरा रहा और दूर-दराज के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भी बड़ी संख्या में सहभागिता निभाई। 

महायज्ञ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु प्रतिदिन भव्य भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाप्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। आयोजन को सुव्यवस्थित एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में प्रशासन का भी पूर्ण सहयोग मिल रहा है। कार्यक्रम के सफल संचालन में सनातन संस्कृति सेवा समिति के अध्यक्ष सोनू कुमार, सचिव सुमन कुमार, सह-कोषाध्यक्ष रॉकी कुमार, उपाध्यक्ष राजेश कुमार उर्फ पाजो जी, सदस्य राहुल रावत, युवराज कुमार, राकेश कुमार राम, धीरज रावत, रणबीर राव, संतोष पंडित, ठाकुर अंकित, ब्रह्मदेव कुमार, आदित्य रावत सहित अन्य सदस्य पूरी निष्ठा और समर्पण भाव से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।

 समिति के सह-कोषाध्यक्ष रॉकी कुमार ने जानकारी दी कि प्रतिदिन संध्या 5 बजे से पंडित कृष्णकांत जी महाराज द्वारा श्रीरामकथा का वाचन किया जा रहा है। साथ ही प्रतिदिन शाम 7 बजे से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इस विराट आयोजन में राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति भी लगातार देखने को मिल रही है। 

विराट महायज्ञ, रामकथा और रामलीला के माध्यम से इन दिनों गिद्धौर का संपूर्ण वातावरण सनातन संस्कृति, भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया है, जो समाज में धार्मिक चेतना के साथ-साथ आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक एकता का सशक्त संदेश दे रहा है।

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