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Thursday, February 12, 2026

श्रद्धांजलि बनी जीवनदान: तेरहवीं पर स्वैच्छिक रक्तदान की अनूठी पहल

श्रद्धांजलि बनी जीवनदान: तेरहवीं पर स्वैच्छिक रक्तदान की अनूठी पहल


सिटी स्टेट ब्यूरो उत्तर प्रदेश : राजीव शर्मा/मनोज कुमार 

खतौली : परंपराओं को नई दिशा देते हुए खतौली के सैनी नगर निवासी स्वर्गीय सरोज बाला शर्मा, पत्नी मेघपाल शर्मा की तेरहवीं के अवसर पर 12 फरवरी 2026 को जी.टी. रोड स्थित आर्यन बैंक्वेट हॉल में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह पहल क्षेत्र में अपनी तरह का पहला प्रयास मानी जा रही है, जिसमें शोक सभा को सामाजिक सेवा से जोड़ा गया।

तेरहवीं जैसे पारंपरिक संस्कार को “मानवता के महादान” से जोड़ते हुए परिवार और आयोजकों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि दिवंगत आत्मा की सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जो किसी जरूरतमंद को जीवन प्रदान करे।

शिविर का आयोजन एस.एल.आर.सी.एस. रूरल डेवलपमेंट फाउंडेशन एवं सर्वेशम मंगलम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। रक्त संग्रहण के लिए तुषार चैरिटेबल ब्लड सेंटर, मुजफ्फरनगर की चिकित्सकीय टीम पूरे समय मौजूद रही, जिन्होंने निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के तहत सुरक्षित तरीके से रक्त संग्रह किया।

कार्यक्रम का संचालन एस.एल.आर.सी.एस. रूरल डेवलपमेंट फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अंकुर प्रकाश गुप्ता “मानव” ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “रक्तदान केवल एक यूनिट रक्त देना नहीं, बल्कि किसी अजनबी के जीवन में आशा का संचार करना है। यदि तेरहवीं जैसे अवसर मानव सेवा से जुड़ें, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई परंपरा स्थापित हो सकती है।”

आयोजन को सफल बनाने में सुगंधा नारंग, सुमन सेन और उत्तम कुमार गुप्ता सहित कई स्वयंसेवकों का योगदान रहा। वहीं राजीव शर्मा, संजीव शर्मा, चिंटू शर्मा, संजय शर्मा, मोतीराम, प्रवीण शर्मा, रजनीश वर्मा, नकुल गुप्ता, राजीव वर्मा, मानसी वर्मा, मानवी गुप्ता, श्रीनिवास शर्मा, मेघपाल शर्मा, श्याम सुंदर शर्मा, पूजा शर्मा, मुकेश, अनिल शर्मा और अन्य सहयोगियों की सक्रिय भागीदारी रही।

उपस्थित गणमान्य नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पहल को “नई सोच की सशक्त शुरुआत” बताते हुए सराहना की। उनका कहना था कि जब संस्कार और सेवा साथ जुड़ते हैं, तो वे केवल परंपरा नहीं रहते, बल्कि समाज में परिवर्तन का माध्यम बन जाते हैं।

यह स्वैच्छिक रक्तदान शिविर न केवल एक सामाजिक कार्यक्रम रहा, बल्कि एक संदेश भी—कि श्रद्धांजलि को सेवा से जोड़कर जीवनदान का माध्यम बनाया जा सकता है।

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