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Thursday, January 1, 2026

नए साल पर निशांत कुमार के राजनीतिक सक्रिय होने की झलक, JDU में उत्तराधिकार पर सियासी चर्चा

नए साल पर निशांत कुमार के राजनीतिक सक्रिय होने की झलक, JDU में उत्तराधिकार पर सियासी चर्चा

पटना/नालंदा। नए साल की सुबह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार पूरी तरह सक्रिय दिखाई दिए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पुत्र निशांत को लेकर नालंदा पहुंचे और अपने पैतृक गांव कल्याण बिगहा में मां परमेश्वरी देवी की पुण्यतिथि पर कविराज रामलखन सिंह स्मृति वाटिका में श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर निशांत कुमार ने भी दादी को श्रद्धांजलि दी और स्थानीय लोगों एवं पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी।

निशांत कुमार ने गरीबों और बच्चों में कंबल बांटे, महिलाओं से मुलाकात की और गेस्ट हाउस में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ नाश्ता किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय जनता की समस्याओं को सुलझाने का भरोसा भी दिया।

पार्टी कार्यकर्ताओं में उम्मीदें

पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की मान्यता है कि निशांत कुमार JDU में सक्रिय भूमिका निभाएं। 5 दिसंबर को पटना एयरपोर्ट पर राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने निशांत कुमार के सामने कहा कि सभी कार्यकर्ता चाहते हैं कि वह अब पार्टी में सक्रिय हों।

तीन नवंबर और सितंबर में भी चर्चा रही कि निशांत फिलहाल राजनीति से दूर रहेंगे। हालांकि चुनाव परिणाम और परिवार के करीबी नेताओं के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अब निशांत के सक्रिय होने की संभावना बढ़ गई है।

JDU में उत्तराधिकार की सियासी पृष्ठभूमि

विश्लेषकों के अनुसार, नीतीश कुमार के बाद JDU में कोई पॉपुलर और कोर वोट बैंक (कुर्मी-कोईरी और EBC) का नेता नहीं है। वरिष्ठ नेता जैसे राजीव रंजन सिंह, संजय झा, विजय चौधरी और अशोक चौधरी हैं, लेकिन वे JDU के कोर वोटर समूह से नहीं आते।

विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार से आने वाला उत्तराधिकारी, यानी निशांत कुमार, पार्टी के लिए विवाद रहित विकल्प है। इसके अलावा, भारत में करिश्माई नेतृत्व वाली पार्टियों में परिवार से उत्तराधिकारी देने की प्रथा रही है। इससे JDU के भविष्य को सुरक्षित रखना संभव है, जबकि बाहर से किसी नेता को देने पर पार्टी में संघर्ष उत्पन्न हो सकता है।

विशेषज्ञ अभिरंजन कुमार के अनुसार, राजनीति में परिवार आधारित नेतृत्व का प्रभाव लंबी अवधि में स्थिरता लाता है। उन्होंने बताया कि जिन पार्टियों ने समय रहते अपने उत्तराधिकारी घोषित नहीं किए, वे संकट में आ गई हैं, जैसे कि शोषित समाज दल, जनता पार्टी और AIADMK।

निशांत कुमार की सक्रियता और JDU में उत्तराधिकार पर चर्चा आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में नई दिशा तय करेगी।

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