जमुई में आदिवासी सोहराय पर्व का भव्य समापन, सरकारी अवकाश की उठी मांग
जमुई। श्रीकृष्ण सिंह स्टेडियम मैदान में शनिवार को आदिवासी सोहराय पर्व का समापन समारोह उत्साह और परंपरागत उल्लास के साथ आयोजित किया गया। आदिवासी संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम का नेतृत्व जिला सचिव कालू मरांडी ने किया। समारोह में जिले के विभिन्न प्रखंडों और गांवों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के महिला-पुरुष, बुजुर्ग और युवाओं ने भाग लिया।
पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर समूचे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। कार्यक्रम स्थल पर आदिवासी संस्कृति, लोक परंपराओं और सामुदायिक एकता की सशक्त झलक देखने को मिली।
समारोह को संबोधित करते हुए बासुदेव हांसदा, बालेश्वर हेब्रम, डॉ. सुनील मूर्मू और राजकिशोर किस्कू सहित अन्य वक्ताओं ने सोहराय पर्व पर सरकारी अवकाश घोषित करने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि सोहराय आदिवासी समाज की सांस्कृतिक अस्मिता और परंपरा का प्रतीक है, जिसे पीढ़ियों से श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता रहा है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने की आवश्यकता पर बल दिया।
जिला सचिव कालू मरांडी ने अपने संबोधन में कहा कि सोहराय पर्व पूर्वजों की अमूल्य विरासत है, जो गांवों में सामाजिक एकता और भाईचारे को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालय में समापन समारोह आयोजित करने का उद्देश्य आदिवासी समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती से सामने लाना है। मरांडी ने झारखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सोहराय पर्व पर सरकारी अवकाश घोषित है, जबकि बिहार में अब तक ऐसी व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने बिहार सहित पूरे देश में इस पर्व पर सरकारी छुट्टी घोषित करने की मांग दोहराई।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। समारोह शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

No comments:
Post a Comment