खनन माफिया के खिलाफ किसानों का अनिश्चितकालीन धरना 12वें दिन भी जारी, उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज
जमुई : मौरा बालू घाट की बंदोबस्ती एवं कथित अवैध खनन के विरोध में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना रविवार को 12वें दिन भी जारी रहा। भाकपा माले नेता बाबू साहब सिंह के नेतृत्व में दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसान धरनास्थल पर डटे हुए हैं। आंदोलनकारियों ने जिला प्रशासन पर अब तक वार्ता नहीं करने का आरोप लगाते हुए अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
धरनार्थियों की प्रमुख मांगों में मौरा बालू घाट की बंदोबस्ती की उच्चस्तरीय जांच, रात्रि खनन पर पूर्ण प्रतिबंध का सख्ती से पालन, डंपिंग स्थलों पर बालू भंडारण की जांच तथा पब्लिक हियरिंग प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच शामिल है। किसानों का आरोप है कि रात्रि खनन पर आधिकारिक रोक के बावजूद रातभर भारी मशीनों से धड़ल्ले से उत्खनन किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में पर्यावरणीय और कृषि संकट गहरा रहा है।
बाबू साहब सिंह ने कहा कि वर्ष 2018 में ग्रामीणों की शिकायतों के आधार पर तत्कालीन जिला प्रशासन ने खनन से सिंचाई तंत्र एवं जलस्तर पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए मौरा बालू घाट की बंदोबस्ती रद्द करने की अनुशंसा की थी। उनके अनुसार, उस समय यह आशंका जताई गई थी कि नदी का तल ‘रिचार्ज/इनटेक लेवल’ से नीचे चला जाएगा, जिससे हजारों एकड़ कृषि भूमि बंजर हो सकती है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि बाद में तथ्यों को नजरअंदाज कर पुनः बड़े रकबे की बंदोबस्ती कर दी गई, जिससे कई गांवों में पेयजल और सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो रही है।
धरने पर बैठे किसानों का कहना है कि खनन गतिविधियों के कारण मौरा, बंधोरा, निजुआरा, धोबघट, प्रधानचक समेत आसपास के गांवों में जलस्तर प्रभावित हुआ है और फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की पारदर्शी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। हालांकि, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि खनन गतिविधियां निर्धारित नियमों के तहत संचालित की जा रही हैं और शिकायतों की जांच की जा रही है।
धरनास्थल पर अशोक सिंह, सचिता रावत, अनिल रावत, कांता प्रसाद, सरवन यादव, सरयू रावत, राम प्रवेश रावत, शैलेंद्र सिंह, सुबोध रावत, मुरारी सिंह, विक्रम यादव, मुकेश रावत सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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