भारतीय संस्कृति से परिवार को जोड़ने का संदेश, पश्चिमी सभ्यता पर कड़ा प्रहार, जमुई में श्री रामचरितमानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ का भव्य समापन - City Channel

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Tuesday, December 23, 2025

भारतीय संस्कृति से परिवार को जोड़ने का संदेश, पश्चिमी सभ्यता पर कड़ा प्रहार, जमुई में श्री रामचरितमानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ का भव्य समापन

भारतीय संस्कृति से परिवार को जोड़ने का संदेश, पश्चिमी सभ्यता पर कड़ा प्रहार, जमुई में श्री रामचरितमानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ का भव्य समापन

जमुई : भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और पारिवारिक परंपराओं को सशक्त करने के उद्देश्य से जमुई नगर परिषद क्षेत्र में आयोजित श्री रामचरितमानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ का सोमवार को भव्य समापन हुआ। यह आयोजन श्री आशुतोष जी महाराज द्वारा स्थापित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में श्याम मंदिर के समीप रामभक्त श्री राजेश केशरी के खाली भूखंड पर संपन्न हुआ। यह आध्यात्मिक अनुष्ठान पौष कृष्ण पक्ष त्रयोदशी से पौष शुक्ल पक्ष द्वितीया (18 दिसंबर से 22 दिसंबर 2025) तक चला।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रामभक्तों और श्रद्धालुओं ने भाग लेकर रामचरितमानस और श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया। प्रतिदिन कथा, प्रवचन और भजन के माध्यम से धर्म, संस्कार और जीवन मूल्यों पर विस्तार से चर्चा की गई।

पश्चिमी सभ्यता पर तीखा प्रहार

अंतिम दिन व्यास गद्दी से प्रवचन करते हुए स्वामी रघुनंदनानंदजी महाराज ने पश्चिमी सभ्यता की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति परिवार, संयम और परंपराओं पर आधारित है, जबकि पश्चिमी सभ्यता व्यक्ति को तन, मन और धन से भटकाने का कार्य करती है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अंग्रेजी भाषा स्वयं में अधूरी है और भारतीय परंपराओं की तुलना पश्चिमी तौर-तरीकों से नहीं की जा सकती। स्वामी जी ने जन्मदिन मनाने की पश्चिमी शैली—केक काटना और मोमबत्ती बुझाना—को अशुभ बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में व्यक्ति स्वयं अपना जन्मदिन नहीं मनाता, बल्कि समाज और परिवार उसे सम्मान देता है।

सच्चे गुरु के सानिध्य का महत्व

स्वामी रघुनंदनानंदजी ने कहा कि जीवन में सच्चा मार्गदर्शन केवल सच्चे गुरु के सानिध्य से ही मिलता है। सच्चे गुरु ही मोक्ष की युक्ति बताते हैं और परम पिता परमेश्वर से साक्षात्कार का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने लोगों से भारतीय संस्कृति को अपनाने और पश्चिमी दिखावे से दूर रहने का आह्वान किया।

सम्मान एवं भंडारे के साथ समापन

समापन अवसर पर व्यास गद्दी पर आसीन श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्यों एवं शिष्याओं को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद स्वरूप सामूहिक भोजन (भंडारा) का आयोजन किया गया।

आयोजन में मिला व्यापक सहयोग

इस आध्यात्मिक आयोजन को सफल बनाने में कुणाल सिंह, राजेश केशरी, श्रीकांत भगत, उषा माता, अरविंद जी, अमृता भारती जी, त्रिपुरारी भगत, रीशु सिंह, गोपी सिंह, विवेक सिंह एवं अजीत सिंह का तन-मन-धन से उल्लेखनीय सहयोग रहा।

कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को आध्यात्मिक रूप से जागृत करने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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