बिहार के संस्कृत विद्यालय बनेंगे मॉडल स्कूल, सिलेबस से लेकर एमडीएम तक होगा व्यापक बदलाव
समस्तीपुर : बिहार राज्य संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय झा शनिवार को समस्तीपुर पहुंचे, जहां उन्होंने जिले के संस्कृत विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के साथ बैठक कर संस्कृत शिक्षा के सर्वांगीण विकास पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में संस्कृत विद्यालयों को मॉडल विद्यालय के रूप में विकसित करने की योजना पर विशेष जोर दिया गया।
पत्रकारों से बातचीत में बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि बिहार के सभी संस्कृत विद्यालयों को अब सर्व शिक्षा अभियान से जोड़ा जाएगा। इसके तहत विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन (एमडीएम), पोशाक योजना और साइकिल योजना भी लागू की जाएगी। छात्रों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी विद्यालयों के हेड मास्टर और शिक्षकों को दी गई है।
उन्होंने जानकारी दी कि राज्य के 47 संस्कृत विद्यालयों को मॉडल विद्यालय के रूप में विकसित करने के लिए चुना गया है, जबकि 50 संस्कृत हाई स्कूलों को 10+2 संस्कृत विद्यालय में अपग्रेड किया जाएगा, जहां उपशास्त्री स्तर तक की पढ़ाई संभव हो सकेगी।
मृत्युंजय झा ने बताया कि संस्कृत विद्यालयों के विकास के लिए केंद्र सरकार से भी सहयोग लिया जा रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री को 1296 करोड़ रुपये की डीपीआर भेजी गई है। इसकी स्वीकृति मिलते ही जर्जर भवनों के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा, ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा में लंबे समय से चली आ रही कमियों को दूर किया जा रहा है। करीब 27 साल पुराने सिलेबस को पूरी तरह बदला जा रहा है। नए पाठ्यक्रम में रामचरितमानस, श्रीमद्भगवद्गीता जैसे ग्रंथों को शामिल किया गया है। सरकार को नए सिलेबस का प्रस्ताव भेज दिया गया है और आगामी सत्र से नई पाठ्यक्रम व्यवस्था लागू होगी।
इसके साथ ही परीक्षा नियमावली में भी बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वर्ष 1996 के बाद पहली बार परीक्षा नियमों में संशोधन किया जा रहा है और नए सत्र से नई नियमावली के तहत परीक्षा आयोजित की जाएगी।
बोर्ड अध्यक्ष ने यह भी बताया कि सामान्य वर्ग के फर्स्ट डिवीजन और अनुसूचित जाति-जनजाति के सेकेंड डिवीजन से उत्तीर्ण छात्रों को प्रोत्साहन राशि के रूप में 10 हजार रुपये दोबारा दिए जाएंगे। इसके लिए सरकार को छात्रों की सूची भेज दी गई है और जल्द ही राशि उनके खातों में भेजी जाएगी।
उन्होंने कहा कि इन सभी प्रयासों का उद्देश्य संस्कृत शिक्षा को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप मजबूत बनाना और विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, संस्कार और धर्म से जोड़ते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।



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