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Thursday, December 25, 2025

खतौली में क्रिसमस पर्व पर आध्यात्मिक उल्लास, विशेष प्रार्थनाओं से सजा चर्च परिसर

खतौली में क्रिसमस पर्व पर आध्यात्मिक उल्लास, विशेष प्रार्थनाओं से सजा चर्च परिसर

🔹गरीब और शोषितों के उद्धार का संदेश देता प्रभु यीशु का जन्मोत्सव

सिटी स्टेट ब्यूरो उत्तरप्रदेश : राजीव शर्मा/मनोज कुमार

खतौली मुजफ्फरनगर : प्रेम, शांति और मानवता के संदेशवाहक प्रभु यीशु मसीह का जन्मदिवस क्रिसमस 25 दिसंबर 2025 को खतौली नगर में पूरी श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण के साथ मनाया गया। नगर के मेथोडिस्ट चर्च और एपिफेनी चर्च सीएनआई में विशेष आराधनाओं का आयोजन किया गया, जिसमें मसीही समाज के साथ-साथ अन्य समुदायों के लोगों ने भी सहभागिता कर आपसी भाईचारे और सौहार्द का परिचय दिया।

मेथोडिस्ट चर्च में क्रिसमस की पूर्व संध्या पर आयोजित वॉच नाइट सर्विस के दौरान रेव. ब्रेसिन ने अपने प्रवचन में कहा कि प्रभु यीशु मसीह मानवता को पाप, घृणा और अंधकार से बाहर निकालने के लिए धरती पर आए। उन्होंने कहा कि आज जब समाज में हिंसा, असहिष्णुता और वैमनस्य की भावना बढ़ रही है, ऐसे समय में यीशु का प्रेम, करुणा और क्षमा का संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।

क्रिसमस के दिन प्रातःकाल चर्च में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई। इस अवसर पर प्रिस्ट एस. टी. गिल ने अपने संदेश में कहा कि प्रभु यीशु मसीह ने निस्वार्थ प्रेम, त्याग और सेवा का जो मार्ग दिखाया है, वह संपूर्ण मानव समाज के लिए पथप्रदर्शक है। उन्होंने कहा कि यदि हम यीशु के जीवन मूल्यों को अपनाएं, तो समाज में शांति और सद्भाव स्वतः स्थापित हो सकता है। इस दौरान बाइबल पाठ और कैरल गीतों के माध्यम से प्रभु की स्तुति की गई, जिससे पूरा चर्च परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

एपिफेनी चर्च सीएनआई में मध्य रात्रि प्रभु भोज की विशेष आराधना पादरी सुशील कुमार द्वारा संपन्न कराई गई। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु मसीह का जन्म इस बात का प्रतीक है कि ईश्वर स्वयं मनुष्य के दुःख-दर्द को समझने के लिए धरती पर आए। उनका जीवन हमें सिखाता है कि समाज में शांति, समानता और न्याय तभी संभव है, जब हम एक-दूसरे के प्रति प्रेम, सेवा और सहानुभूति की भावना रखें।

आराधनाओं के उपरांत चर्च परिसरों में केक काटकर श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। इसके साथ ही बोनफायर का आयोजन हुआ तथा बच्चों और युवाओं द्वारा विशेष भजन और गीत प्रस्तुत किए गए। सुबह की आराधना में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जिनमें आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग भी मौजूद थे।

कुल मिलाकर, खतौली में क्रिसमस का यह पर्व केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक सौहार्द, आपसी भाईचारे और मानवीय मूल्यों के उत्सव के रूप में भी मनाया गया, जिसने नगर के वातावरण को प्रेम और शांति के संदेश से सराबोर कर दिया।

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