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Tuesday, December 23, 2025

मनरेगा का नाम बदलना हिंदू संस्कृति के विरुद्ध, यह अपशकुन : धनंजय

 मनरेगा का नाम बदलना हिंदू संस्कृति के विरुद्ध, यह अपशकुन : धनंजय

जमुई : महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के नाम और नीति में किए गए परिवर्तन के विरोध में सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) की ओर से मुजफ्फरपुर में सोमवार से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन जारी है। 

    इस धरने में मंगलवार को पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष जमुई जिला निवासी धनंजय कुमार सिन्हा भी शामिल हुए और केंद्र सरकार के फैसले पर तीखा हमला बोला। धरना स्थल पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना हिंदू धर्म की संस्कृति और परंपराओं के भी खिलाफ है। उन्होंने कहा कि मनरेगा का नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया था जिसे अब भगवान श्रीराम के नाम पर कर दिया गया है। गांधी जी भगवान श्रीराम के बड़े भक्त थे और वे प्रतिदिन रघुपति राघव राजा राम की प्रार्थना गाते थे। 

     धनंजय कुमार सिन्हा ने हिंदू परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि हमारे धर्म में भगवान की माला उतारकर भक्त के गले में पहनाने की परंपरा है, लेकिन भक्त के गले की माला उतारकर भगवान के गले में नहीं पहनाई जाती। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि रामभक्त महात्मा गांधी के नाम से चल रही योजना का नाम बदलकर भगवान श्रीराम के नाम करना भक्त के गले की माला को उतारकर भगवान के गले में पहनाने जैसा है जो एक अपशकुन भी है, जिसके दुष्परिणाम केंद्र सरकार और उसके मुखिया प्रधानमंत्री मोदी को भविष्य में भुगतने पड़ेंगे। 

      उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना में साल में 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है पर सरकार औसतन 50 दिन ही रोजगार दे पाती थी जिसे धरातल पर बढ़ाने के बजाय सरकार 125 दिन की कागजी गारंटी की झूठी जुमलाबाजी कर रही है जबकि हकीकत यह है कि जो सरकार 365 दिन में 100 दिन रोजगार नहीं दे पा रही थी, अब नई योजना के तहत सरकार यह भी कह रही है कि वह 60 दिन रोजगार नहीं देगी, मतलब अब 305 दिन में ही सरकार 125 दिन के रोजगार की गारंटी की बात कह रही है जिस पर भरोसा करना मुश्किल है। 

        सरकार सिर्फ इन उल्टी-पुल्टी बातों में जनता को उलझाना और भगवान श्रीराम के नाम पर लड़ाना चाहती है जबकि आज मजदूरों के पारिश्रमिक को बढ़ाये जाने की जरूरत थी। अभी प्रतिदिन 255 रूपये की दर से प्रतिदिन पारिश्रमिक दिया जाता है उसे कम से कम 400 रूपये प्रतिदिन करने की जरूरत थी। बजाय इसके सरकार मूल मुद्दों को सुलझाने की जगह भगवान श्रीराम और उनके परम भक्त महात्मा गाँधी के नाम पर विवाद खड़ा करके जनता को आपस में उलझाना चाहती है।  गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण यानि वीबी-जी राम जी कर दिया गया है, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है। 

        इस फैसले के विरोध में सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है और मांग की है कि सरकार अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे।

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