झाझा के नागी पक्षी आश्रयणी केंद्र का विधायक दामोदर रावत ने किया निरीक्षण, प्रवासी पक्षियों के संरक्षण और पर्यटन विकास पर दिया जोर, पर्यटन और संरक्षण को मिलेगा नया आयाम
झाझा : झाझा प्रखंड क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध नागी पक्षी आश्रयणी केंद्र का बुधवार को क्षेत्रीय जदयू विधायक दामोदर रावत ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सर्दियों में यहां आने वाले देश-विदेश के प्रवासी पक्षियों को करीब से देखा और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया। यह पक्षी आश्रयणी हर साल सैकड़ों प्रवासी पक्षियों का ठिकाना बनती है, जिससे क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी है।
विधायक दामोदर रावत ने मौके पर मौजूद वन विभाग के कर्मियों से पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, पक्षियों के संरक्षण और आश्रयणी के रखरखाव से संबंधित जानकारी विस्तार से प्राप्त की। उन्होंने कहा कि नागी पक्षी आश्रयणी केंद्र न केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्र के पर्यटन विकास की अपार संभावनाओं को भी दर्शाता है।
विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में इस पक्षी आश्रयणी का बीते वर्षों में काफी विकास हुआ है और आगे भी इसके समग्र विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने याद दिलाया कि पहली बार आयोजित पक्षी महोत्सव के दौरान स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यहां आए थे और उन्होंने भी इस प्राकृतिक धरोहर का आनंद लिया था, जिससे नागी पक्षी आश्रयणी को विशेष पहचान मिली।
उन्होंने बताया कि रामसर सूची में शामिल होने के बाद नागी पक्षी आश्रयणी केंद्र की महत्ता और बढ़ गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी पहचान बनी है। विधायक रावत ने कहा कि भविष्य में यहां बर्ड म्यूजियम की स्थापना की योजना है, जिससे पर्यटकों और विद्यार्थियों को प्रवासी पक्षियों के बारे में विस्तृत जानकारी मिल सकेगी।
विधायक ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि नागी पक्षी आश्रयणी केंद्र को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि देश-दुनिया से अधिक से अधिक पर्यटक यहां आएं। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
निरीक्षण के अंत में उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों और कर्मियों को निर्देश दिया कि पक्षियों की सुरक्षा, स्वच्छता और पर्यटकों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि नागी पक्षी आश्रयणी केंद्र अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखे और आने वाले वर्षों में और अधिक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में उभरे।

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