बिहार में 1 जनवरी 2026 से राजस्व अभिलेखों की भौतिक नकल व्यवस्था समाप्त, अब केवल ऑनलाइन मिलेगी डिजिटल सत्यापित प्रति - City Channel

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Wednesday, December 24, 2025

बिहार में 1 जनवरी 2026 से राजस्व अभिलेखों की भौतिक नकल व्यवस्था समाप्त, अब केवल ऑनलाइन मिलेगी डिजिटल सत्यापित प्रति

बिहार में 1 जनवरी 2026 से राजस्व अभिलेखों की भौतिक नकल व्यवस्था समाप्त, अब केवल ऑनलाइन मिलेगी डिजिटल सत्यापित प्रति

पटना : बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। विभाग ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि दिनांक 1 जनवरी 2026 से राजस्व अभिलेखों की सत्यापित (नकल) प्रति जारी करने की पारंपरिक भौतिक प्रणाली पूरी तरह समाप्त कर दी जाएगी। इसके स्थान पर अब केवल ऑनलाइन माध्यम से डिजिटल हस्ताक्षरित प्रतियाँ ही जारी की जाएंगी, जिन्हें कानूनी रूप से सत्यापित प्रतिलिपि माना जाएगा।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि अब तक राजस्व अभिलेखों की सत्यापित प्रति प्राप्त करने के लिए नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। इसके लिए आवेदन (जिसे आमतौर पर चिरकुट कहा जाता है), स्टांप शुल्क, कागजी प्रक्रिया और कई बार कार्यालय आने-जाने जैसी जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था। इस पूरी प्रक्रिया में सामान्यतः 7 से 14 दिन का समय लग जाता था, जो आम नागरिकों, खासकर दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए काफी श्रमसाध्य, खर्चीली और असुविधाजनक थी।

डिजिटल व्यवस्था पहले से प्रभावी

सरकार ने बताया कि भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से पहले से ही राजस्व अभिलेखों की स्कैन की गई प्रतियाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब इन दस्तावेजों को सक्षम पदाधिकारी द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित कर ऑनलाइन ही उपलब्ध कराया जाएगा। इन प्रतियों को ही प्रमाणित (Certified Copy) माना जाएगा।

इस संबंध में राजस्व परिषद, बिहार की अधिसूचना संख्या 831 (दिनांक 26 जून 2024) का भी हवाला दिया गया है, जिसमें बिहार अभिलेखागार हस्तक, 1960 के अंतर्गत नया नियम 297 (क) जोड़ा गया है। इसके अनुसार,

ऑनलाइन माध्यम से निर्गत और डिजिटल हस्ताक्षरित सभी प्रतियाँ प्रमाणित प्रतिलिपि मानी जाएंगी।

ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होने पर भी समाधान

यदि कोई राजस्व अभिलेख भू-अभिलेख पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है, तो भी नागरिक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उपलब्धता के अनुसार उस दस्तावेज को स्कैन कर डिजिटल हस्ताक्षर के साथ पोर्टल के माध्यम से ही उपलब्ध कराया जाएगा।

प्रशासन को निर्देश

इस आदेश की प्रति सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों, जिला अभिलेखागार के प्रभारी पदाधिकारियों और अंचल अधिकारियों को भेजी गई है, ताकि समय रहते इस नई व्यवस्था को लागू किया जा सके।

नागरिकों को मिलेगा बड़ा लाभ

इस फैसले से कार्यालयों के चक्कर समाप्त होंगे, समय और पैसे की बचत होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी, डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा मिलेगा।

राज्य सरकार का यह निर्णय भूमि एवं राजस्व प्रशासन को अधिक सरल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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