अपर किऊल जलाशय की सुरक्षा का डैम पुनरीक्षण पैनल ने लिया जायजा, 24×7 चौकसी पर जोर - City Channel

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Friday, September 19, 2025

अपर किऊल जलाशय की सुरक्षा का डैम पुनरीक्षण पैनल ने लिया जायजा, 24×7 चौकसी पर जोर

अपर किऊल जलाशय की सुरक्षा का डैम पुनरीक्षण पैनल ने लिया जायजा, 24×7 चौकसी पर जोर

जमुई : जिले के बहुप्रतिष्ठित अपर किऊल जलाशय की सुरक्षा व्यवस्था का शुक्रवार को केंद्रीय जल आयोग द्वारा गठित डैम सुरक्षा पुनरीक्षण पैनल (फेज-III) ने गहन निरीक्षण किया। यह पैनल भारत सरकार के बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के अंतर्गत कार्य करता है और देशभर के निर्दिष्ट बांधों की सुरक्षा एवं संचालन व्यवस्था का मूल्यांकन करता है।

निरीक्षण दल का नेतृत्व पैनल के अध्यक्ष एवं रूपांकन विशेषज्ञ शैलेश कुमार श्रीवास्तव ने किया। उनके साथ भूगर्भशास्त्री श्याम लाल कपिल, हाइड्रोलॉजिस्ट राजेंद्र चालीसगांवकर, इंजीनियर राजेश कुमार श्रीवास्तव और इंस्ट्रूमेंटेशन विशेषज्ञ सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे। दल ने जलाशय परिसर का परिभ्रमण कर संरचना, संचालन और निगरानी व्यवस्था का बारीकी से अवलोकन किया।

निरीक्षण के बाद पैनल ने जलाशय की मौजूदा व्यवस्था पर संतोष जताया, साथ ही चेतावनी दी कि सुरक्षा चौकसी में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं होनी चाहिए। अध्यक्ष श्रीवास्तव ने स्पष्ट कहा कि जलाशय की निगरानी 24×7 की तर्ज पर की जाए और अभियंता समय-समय पर तकनीकी मानकों के अनुरूप निरीक्षण रिपोर्ट दर्ज करें।

मौके पर जमुई सिंचाई अंचल के अधीक्षण अभियंता ई. दीपेंद्र कुमार रजक और कार्यपालक अभियंता ई. गौतम कुमार समेत कई विभागीय पदाधिकारी मौजूद रहे। पैनल अध्यक्ष ने अभियंताओं को निर्देश देते हुए कहा कि बांध सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने बताया कि डैम सुरक्षा पैनल न केवल संरचना की नियमित समीक्षा करता है, बल्कि जोखिम मूल्यांकन, आपातकालीन कार्य योजना और रख-रखाव एवं मरम्मत कार्यों के लिए पर्याप्त धन की उपलब्धता पर भी विशेष ध्यान देता है। इसके तहत बांध सुरक्षा सूचकांक का उपयोग कर संभावित खतरों का आकलन किया जाता है।

पैनल ने यह भी स्पष्ट किया कि बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीकी सॉफ्टवेयर का उपयोग अनिवार्य है। इसमें जीआईएस (GIS), फ्लड रूटिंग, और भूकंपीय संरचनात्मक विश्लेषण जैसी तकनीकें शामिल हैं, जिनके जरिए संभावित आपदाओं को पहले से चिन्हित कर समय रहते उपाय किए जा सकते हैं।

निरीक्षण टीम ने स्थानीय अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जलाशय की आपातकालीन कार्य योजना (Emergency Action Plan) पूरी तरह से सक्रिय और कारगर हो। इसमें बाढ़ चेतावनी प्रणाली, राहत प्रबंधन और त्वरित संचार तंत्र जैसी व्यवस्थाओं की निरंतर समीक्षा और क्रियान्वयन आवश्यक है।

अध्यक्ष श्रीवास्तव ने कहा कि जलाशय न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके आसपास बसे लोगों और संपत्तियों की सुरक्षा भी सीधे तौर पर इससे जुड़ी हुई है। इसलिए अभियंताओं और पदाधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे हर परिस्थिति में बांध सुरक्षा नियमों का पालन करें और लापरवाही की कोई गुंजाइश न छोड़ें।

उन्होंने अंत में कहा कि समय पर रख-रखाव और मरम्मत कार्य, पर्याप्त संसाधन और सतत निगरानी ही बांध सुरक्षा का मूल मंत्र है। इस दिशा में अभियंताओं को पूरी निष्ठा से कार्य करना होगा ताकि किसी भी संभावित आपदा को रोका जा सके और जलाशय हमेशा सुरक्षित रहे।

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