2025-26 के बजट के खिलाफ भाकपा (माले) ने किया जमुई कचहरी चौक पर विरोध प्रदर्शन
"2025-26 के बजट में आधी आबादी के लिए कुछ भी नहीं" - शंभू शरण सिंह
"संघर्षरत तबकों की मांगों को अनसुना करने वाला बजट" - बाबू साहब सिंह
इस विरोध कार्यक्रम की अध्यक्षता माले जिला सचिव शंभू शरण सिंह ने की। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल चुनावी दिखावा है, जिसमें आधी आबादी (महिलाओं) के लिए कुछ भी नहीं है। कार्यक्रम का संचालन खेत मजदूर नेता बासुदेव रॉय ने किया, जिन्होंने कहा कि राज्य के 94 लाख अतिनिर्धन परिवारों के लिए भी इस बजट में कुछ नहीं दिया गया है।
बजट में वंचित तबकों की अनदेखी
माले नेता बाबू साहब सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस बजट में गरीब, मजदूर, महिलाओं और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि बजट में आशा, जीविका, विद्यालय रसोइया, बीड़ी मजदूर, निर्माण मजदूर, आंगनवाड़ी कर्मी, माइक्रोफाइनेंस कंपनियों से कर्ज लेने वाली महिलाएं, आउटसोर्सिंग के सफाईकर्मी, कार्यपालक सहायक और अन्य ठेका कर्मियों की मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।
इसके अलावा, अतिनिर्धन परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली, सामाजिक सुरक्षा पेंशन 2500 रुपये करने, महिलाओं को 3000 रुपये सहायता राशि देने, गरीबों को पक्का मकान देने जैसी आवश्यक मांगों पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
जन विरोधी बजट के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया
रसोईया संघ के जिला सचिव मोहम्मद हैदर, जयराम तुरी, इंदु देवी और ब्रह्मदेव ठाकुर ने भी इस जनविरोधी बजट के खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह बजट पूरी तरह से अमीरों के पक्ष में है और इसमें गरीबों के लिए कोई ठोस योजना नहीं है।
इस मौके पर किरण गुप्ता, मंजू देवी, पंकज कुमार सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे, जिन्होंने बजट के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई और सरकार से पुनर्विचार करने की मांग की।
भाकपा (माले) ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार गरीबों, मजदूरों और महिलाओं की उपेक्षा करती रही तो पार्टी सड़कों पर और बड़े आंदोलन करेगी।

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