संत रविदास जयंती पर पर्यावरण भारती द्वारा पौधारोपण
सिटी संवाददाता : प्रो० रामजीवन साहू
पटना साहिब, 12 फरवरी 2025 : प्रसिद्ध संत रविदास जी के जन्म दिवस (माघ पूर्णिमा) के शुभ अवसर पर पर्यावरण भारती द्वारा फलदार वृक्ष (नींबू) और औषधीय पौधे (एलोवेरा) का पौधारोपण किया गया। इस पुनीत कार्य का नेतृत्व महानगर पेड़ उपक्रम प्रमुख हिमालय ने किया।
नारी शक्ति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
इस अवसर पर नारी शक्ति प्रांत टोली सदस्य एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सरिता शंकर ने कहा कि मानव को निःशुल्क प्राकृतिक ऑक्सीजन प्राप्त करने हेतु अपने घरों के आसपास कम से कम 10 पेड़ अवश्य लगाने चाहिए। इससे ग्लोबल वार्मिंग से सुरक्षा मिलेगी और पर्यावरण संतुलन बना रहेगा।
संत रविदास जी का जीवन परिचय एवं योगदान
कार्यक्रम में पर्यावरण भारती के संस्थापक एवं पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक, अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली सदस्य राम बिलास शाण्डिल्य ने संत रविदास जी के जीवन और उनके सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि –
- संत रविदास जी का जन्म माघ पूर्णिमा (सन् 1388 ई.) को उत्तर प्रदेश के काशी के सीर गोवर्धन में हुआ था।
- पिता बाबा संतोख दास जी जूते-चप्पल बनाने का कार्य करते थे, माता कलसा देवी जी धर्मपरायण महिला थीं।
- मात्र 12 वर्ष की उम्र में उनका विवाह लोना देवी से हुआ और उनके पुत्र का नाम विजय दास था।
- बचपन से ही वे संतों की संगति में रहते और आध्यात्मिक चिंतन करते थे, जिसके कारण पिता ने उन्हें घर से निकाल दिया।
- वे जूते-चप्पल बनाकर जीविका चलाते और साधु-संतों की सेवा करते थे।
- उन्होंने भजन, कविता और आध्यात्मिक उपदेशों के माध्यम से समाज में प्रेम, समानता और भाईचारे का संदेश दिया।
- ब्रज भाषा, अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और उर्दू-फारसी के शब्दों का प्रयोग उनकी रचनाओं में मिलता है।
संत रविदास जी के प्रमुख विचार
- गुरु रामानंद जी से दीक्षा प्राप्त कर वे भारत के महान संत, कवि और समाज सुधारक बने।
- चित्तौड़ के महाराणा सांगा की पत्नी झालारानी और मीरा बाई उनकी प्रमुख शिष्याएं थीं।
- संत कबीर दास उनके गुरु भाई थे।
- उन्होंने जाति-पाति और छुआछूत का विरोध किया और आपसी प्रेम तथा मानव धर्म को सबसे श्रेष्ठ बताया।
- गुणवान व्यक्ति की पूजा को सर्वोपरि माना और पाखंड का विरोध किया।
- उनका प्रसिद्ध कथन –
"मन चंगा तो कठौती में गंगा"
अर्थात अगर मन स्वच्छ है तो किसी बाहरी तीर्थ की जरूरत नहीं, सच्ची भक्ति अपने कर्म और आचरण से होती है। - सिख पंथ के पवित्र ग्रंथ "गुरु ग्रंथ साहिब" में भी उनके पदों को शामिल किया गया है।
- उनका देहावसान 1518 ई. में वाराणसी में हुआ।
- उनका प्रसिद्ध भजन –
"प्रभु चंदन हम पानी"
माघ पूर्णिमा पर विशेष आयोजन और प्रयागराज कुंभ
माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर महाकुंभ प्रयागराज-2025 का कल्पवास पूरा हुआ। इस दिन 2 करोड़ से अधिक श्रद्धालु गंगा स्नान करेंगे। इस अमृत स्नान के शुभ अवसर पर पौधारोपण जैसे पुनीत कार्य का विशेष महत्व है।
पौधारोपण का संकल्प और समापन
इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया। सभी लोगों को अपने घरों और आसपास अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि पर्यावरण को स्वच्छ और संतुलित रखा जा सके।
पर्यावरण भारती का यह अभियान समाज को संत रविदास जी के विचारों से जोड़ते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
- पर्यावरण भारती, पटना महानगर

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